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चौपाल: धोखे की तकनीक

महामारी के दौर में देशभर में आॅनलाइन खरीदारी में इक्यावन फीसद तक आॅनलाइन उपयोगकर्ताओं का इजाफा हुआ है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा केवल सत्ताईस फीसद ही था, जिनकी प्राथमिकता आॅनलाइन खरीदारी रही है। बिजनेस डेस्क पर हुए एक अध्ययन के मुताबिक, 2014 में केवल देश भर में पैंतीस मिलियन आॅनलाइन खरीदारी करने वाले लोग थे, जिसका आंकड़ा 2016 में बढ़ कर एक सौ मिलियन हो गया है।

तकनीकी के इस दौर में काफी कुछ बदल गया है। यह बदलाव काफी हद तक बेहतर ही साबित हुआ है। लेकिन बदलते दौर के साथ इंसान आलसी और सुस्त होता जा रहा है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से आज घर बैठे ही सारे काम पूरे हो जाते हैं। इसने इंसान की दुनिया में अपना वर्चस्व इस तरह स्थापित किया है कि मनुष्य खुद को इन सबके बिना कल्पना तक नहीं कर पाता।

इन्हीं के जरिए इंटरनेट के इस्तेमाल ने इंसानों को एक तरह से अपना गुलाम बना दिया है। इसकी चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग आज मानसिक, सामाजिक और शारीरिक तौर पर समाज से दूर होते जा रहे हैं।

इंटरनेट का बहुत बड़ा जाल है।इसमें अगर केवल बात आॅनलाइन खरीदारी के वेबसाइटों की करें तो एक अध्ययन के अनुसार देश भर में हर साल कई मिलियन उपयोगकर्ता इसका उपयोग करते हैं।जब से आॅनलाइन खरीदारी वेबसाइटों का जमाना आया है, साइबर क्राइम और धोखाधड़ी को भी बड़े स्तर पर अंजाम दिया जा रहा है।

इसका शिकार अनजाने में इनका उपयोग कर रहे लोग हो जाते हैं। साइबर सेल की टीम साइबर विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी के बावजूद उपयोगकर्ता के डाटा लीक होने के मामले सामने आते रहते हैं। जो डाटा लीक किया जाता है, उनमें जानकारी के तौर पर उपभोगकर्ता का नाम, ईमेल आईडी, पासवर्ड, संपर्क नंबर, पता, जन्मतिथि, स्थान, आइपी पता आदि शामिल होता है।

महामारी के दौर में देशभर में आॅनलाइन खरीदारी में इक्यावन फीसद तक आॅनलाइन उपयोगकर्ताओं का इजाफा हुआ है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा केवल सत्ताईस फीसद ही था, जिनकी प्राथमिकता आॅनलाइन खरीदारी रही है। बिजनेस डेस्क पर हुए एक अध्ययन के मुताबिक, 2014 में केवल देश भर में पैंतीस मिलियन आॅनलाइन खरीदारी करने वाले लोग थे, जिसका आंकड़ा 2016 में बढ़ कर एक सौ मिलियन हो गया है।

ई-कॉमर्स कंपनियां कई लुभावने प्रस्ताव लेकर आती हैं, जिसके जाल में लोग फंस जाते हैं। इन उपभोगकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी का जरिया कैशबैक, बाय-बैक या एक्सचेंज के विकल्प जैसे सुविधा और लाभ का लोभ देकर किया जाता है। ऐसी स्थिति में जब हमारे निजी डेटा चुराए या लीक किए जाते हैं, इस बात की जवाबदेही हमारी खुद की हो जाती है।

इसलिए हमें अपने पूरे होशोहवास में और जागरूक होकर आॅनलाइन खरीदारी या अन्य काम के लिए ऐसे वेबसाइटों का इस्तेमाल करने की जरूरत है। यह सतर्कता हमारी मूल जिम्मेदारी है।
’निशा कश्यप, हरी नगर आश्रम, नई दिल्ली

क्षेत्रवाद का रास्ता

हरियाणा विधानसभा ने निजी क्षेत्र में पचहत्तर फीसद नौकरियां स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने के लिए एक विधेयक पारित किया है। यह कोई अच्छा फैसला नहीं लगता है। यह खुद प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के सपने के विपरीत है। जहां अनुच्छेद 370 हटाते वक्त यह दलील दी गई थी कि यह जम्मू-कश्मीर के निवासी को अन्य की अपेक्षा अधिक विशेष दर्जा देता है, वहीं इस तरह का आरक्षण ठीक उसके विपरीत है।

इस फैसले से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की काफी संभावना है। बिचौलियों का बोलबाला बढ़ेगा। मजदूरों का शोषण बढ़ेगा। इस तरह की पेचीदगी से निवेशिकों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। ‘इज आॅफ डूइंग बिजनेस’ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। कई सूचना तकनीक उद्योग के गुरुग्राम छोड़ कर नोएडा की ओर जाने की संभावना बढ़ गई है।
सरकार का उद्देश्य रोजगार बढ़ाने पर होना चाहिए, न कि इस तरह का कोई सीमा लगाकर रोजगार के अवसर को घटाने का कदम उठाना चाहिए। यह कोई अन्य राज्यों के लिए अच्छा उदाहरण पेश नहीं करेगा।

अगर ऐसा ही निर्णय मुंबई केवल मुंबईवासियों के लिए और दिल्ली दिल्लीवासियों के लिए कर दिया जाए और इसी तर्ज पर सभी दूसरे राज्य और शहर करने लगें तो फिर क्या होगा? यह निर्णय केवल क्षेत्रवाद और इसकी पृष्ठभूमि पर देश के स्तर पर जटिल खींचतान को बढ़ावा देगा। कोशिश समस्या का हल ढूंढ़ने पर होनी चाहिए, न? की नई समस्या पैदा करने पर।
’मो फैयाज आलम, दिल्ली

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