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चौपाल: चिंता के मद्देनजर

कोरोना के बढ़ते रफ्तार को देखते हुए परीक्षा नहीं कराने की मांग फिलहाल व्यावहारिक और जायज भी है, लेकिन गंभीर मसला यह है कि परीक्षा न कराने की स्थिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पास विकल्प क्या है? बड़े स्तर पर मास प्रमोशन भी विद्यार्थियों के हित में नहीं है।

Education, university, education centreशिक्षा के चार मुख्य स्तम्भ जिन पर चर्चा होती है, उनमें तीन से सभी परिचित हैं- ज्ञान पाना, कौशल सीखना, और व्यक्तित्व-विकास। इक्कीसवीं सदी में इन तीनों से पहले जिस स्तंभ को इंगित किया गया है, वह है- ‘साथ-साथ रहना सीखना’!

महामारी के चलते हमारे शिक्षा व्यवस्था के सामने एक गंभीर चुनौती बनी हुई है कि पिछले चार महीने से बंद पड़े स्कूल, कॉलेज को कैसे खोला जाए! बहुत सारे विश्वविद्यालयों में अकादमिक परीक्षाएं भी स्थगित हैं। इसी बीच खबर आई है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और बीएचयू अंतिम वर्षों के विद्यार्थियों की परीक्षा लेने की तैयारी कर रहा है। इस मांग का सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ और संक्रमण के लिहाज से चिंता जताई गई।

कोरोना के बढ़ते रफ्तार को देखते हुए परीक्षा नहीं कराने की मांग फिलहाल व्यावहारिक और जायज भी है, लेकिन गंभीर मसला यह है कि परीक्षा न कराने की स्थिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पास विकल्प क्या है? बड़े स्तर पर मास प्रमोशन भी विद्यार्थियों के हित में नहीं है। अगर उनको आगे के लिए प्रोन्नत कर दिया जाता है तो फिर यह खतरा बना रहेगा कि कहीं कोरोना काल की समाप्ति के बाद उनके डिग्री को संदेह की दृष्टि से न देखा जाए।

इसके अलावा, गांव-देहात में इंटरनेट की कनेक्टिविटी के बेहद खराब हालात को देखते हुए आनलाइन परीक्षा कराना फिलहाल न्यायसंगत नहीं लग रहा है। ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को मिल बैठकर बीच का कोई रास्ता निकालना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में न डूबे और उनकी जिदंगी दांव पर न लगे।
’कुंदन कुमार, बीएचयू, वाराणसी

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