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चौपाल: लोकतंत्र में रिश्ते

बेहतर हो अगर हर एक राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व ऐसी उदारवादी नीतियों का सृजन करे, जिसके अंतर्गत विरोधी पक्ष की सकारात्मक भूमिका के प्रति समर्थन का भाव हो।

bihar election 2020कोरोना वायरस माहमारी के बीच साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए चुनौती होगा। (फाइल फोटो)

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में राजनीतिक पूर्वाग्रहों के चलते परस्पर रिश्तों के ताने-बाने में वह प्रगाढ़ता नहीं रही जो किसी जमाने में हुआ करती थी। कांग्रेस को अपने पूर्वजों के द्वारा स्थापित परंपरा के अनुपालन करते हुए अपनी रीति-नीति सुनिश्चित करनी चाहिए।

माना कि प्रतिपक्ष का स्वाभाविक धर्म सत्तापक्ष के कार्यों को आलोचना के घेरे में लेने का है और शायद ऐसा होना भी चाहिए। लेकिन अगर सत्तापक्ष द्वारा ऐसी नीतियां क्रियान्वित की जा रही हों जिसका विरोध करना उनके अपने दल के अनुयायियों को अखर जाए, तो ऐसा विरोध गैरजरूरी है।

बेहतर हो अगर हर एक राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व ऐसी उदारवादी नीतियों का सृजन करे, जिसके अंतर्गत विरोधी पक्ष की सकारात्मक भूमिका के प्रति समर्थन का भाव हो। राजनीति में सत्तापक्ष हो या प्रतिपक्ष, जब जनहित के प्रति समर्पित ही रहना है, तब व्यापक जनहित में उठाए गए कदमों को प्रतिद्वंदियों द्वारा मुक्तकंठ से सराहा जाना चाहिए।

अगर ऐसा नहीं हो सकता तो यह मान लिया जाए कि अभी तक हमारा लोकतंत्र परिपक्वता को नहीं प्राप्त हुआ है। दरअसल निरंतर परिवर्तित दौर में तमाम राजनीतिक दलों को उदारवादी दृष्टिकोण आत्मसात करना चाहिए।
’अरविंद पाराशर, फतेहपुर, उप्र

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