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चौपालः जल और कल

इन दिनों देश के लगभग आधे हिस्से में जम कर बारिश हो रही है। मानसून की ऐसी मेहरबानी देखकर कहीं से भी नहीं लगता कि इसी मुल्क के कुछ इलाकों में लोग बूंद-बूंद के लिए भी तरस जाते हैं।

Author July 10, 2018 04:22 am
हमारे देश में जहां पानी का प्रमुख स्रोत बरसात ही है वहां पर ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ या पानी को जमीन में सहेजना ही बेहतर उपाय है।

जल और कल

इन दिनों देश के लगभग आधे हिस्से में जम कर बारिश हो रही है। मानसून की ऐसी मेहरबानी देखकर कहीं से भी नहीं लगता कि इसी मुल्क के कुछ इलाकों में लोग बूंद-बूंद के लिए भी तरस जाते हैं। सवाल है कि जब प्रकृति हमें वर्षा के रूप में इतना सारा जल उपलब्ध करा देती है तो हम इसका संग्रहण क्यों नहीं करते हैं? अजीब बात है कि हम पानी को सहेजने का नाम तक नहीं ले रहे हैं। आज हालत यह है कि वर्षा का पचासी फीसद जल व्यर्थ बह जाता है। वर्षा जल को सहेजने का समुचित प्रबंध न होने से वह बाढ़ का रूप लेकर भयंकर तबाही मचाते हुए नदियों के रास्ते उसी समुद्र में पहुंच जाता है जहां से उसने चलना प्रारंभ किया था।

लगातार गिरता हुआ भूजल स्तर संपूर्ण जैव जगत के लिए बहुत विकट समस्या बन चुका है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यदि इसी प्रकार भूमिगत जल का स्तर घटता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मनुष्य पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेगा और विश्व में जल-युद्ध की नौबत आ जाएगी। इसी वर्ष भारत में मई-जून में शिमला समेत कई बड़े शहरों में जलसंकट की जो स्थिति बन गई थी उससे हर कोई वाकिफ है। लेकिन विडंबना है कि हम समस्या से सबक लेने के बजाय थोड़ी-सी राहत मिलते ही सबकुछ भूल जाते हैं और कोई ऐसे इंतजाम नहीं करते जिनसे फिर ऐसी समस्या उत्पन्न न हो।

हमारे देश में जहां पानी का प्रमुख स्रोत बरसात ही है वहां पर ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ या पानी को जमीन में सहेजना ही बेहतर उपाय है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि देश के कुल जमीनी क्षेत्रफल में से सिर्फ पांच फीसद में होने वाली वर्षा के जल को संग्रहीत कर लिया जाए तो रोजाना एक अरब लोगों को सौ लीटर पानी मिल सकता है। बारिश के हर मौसम में सौ वर्गमीटर आकार की छत पर पैंसठ हजार लीटर वर्षा जल को एकत्रित किया जा सकता है जिससे चार सदस्यों वाले एक परिवार की पेयजल और घरेलू जल आवश्यकताओं की कम से कम पांच महीनों तक पूर्ति हो सकती है।

जल संरक्षण और वर्षा जल संग्रहण के लिए सरकार को युद्ध स्तर पर काम करना होगा। गांवों, शहरों और नदियों के किनारे तालाब बनवाए जाएं। हर घर में शौचालय की अनिवार्यता की तरह ही वर्षा जल संग्रहण के लिए ‘सोकपिट गड्ढे’ बनवाए जाएं। आम लोगों को वर्षा जल संग्रहण के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही, लोगों को चाहिए कि वे वर्षा के जल को व्यर्थ न बहने दें, उसका हर हाल में संरक्षण करें क्योंकि ‘जल है तो कल है’।

अंकित रजक, बिल्हारी-दतिया, मध्यप्रदेश

निर्भया को इंसाफ

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया से बलात्कार और उसकी हत्या करने वाले तीन मुजरिमों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर उनकी फांसी की सजा बरकार रखी है। इससे उन सभी को राहत मिली है जो लंबे समय से निर्भया के लिए इंसाफ की मांग कर रहे थे। यह फैसला अपराधियों के मन में डर पैदा करेगा कि वे कितनी भी कोशिश कर लें, कानून के शिकंजे और सजा से बच नहीं सकते।

’सपना, कस्तूरी राम कॉलेज, दिल्ली

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