मन के रोग

भारत में लोग बड़ी तेजी से मानसिक रोगों का शिकार हो रहे हैं।

सांकेतिक फोटो।

भारत में लोग बड़ी तेजी से मानसिक रोगों का शिकार हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक सैंतालीस फीसद लोग मानसिक रोगों की चपेट में हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद ने 2017 में पहली बार इस पर व्यापक अध्ययन किया, तो पता चला कि 4.57 करोड़ लोग मानसिक विकार, अवसाद और 4.49 करोड़ लोग बेचैनी से पीड़ित हैै।

मानसिक रोग से छुटकारा पाने के लिए परिवार का साथ होना बहुत जरूरी है। परिवार का सहयोग होने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता और नए कार्य करने में उत्सुकता होती है, जिससे व्यक्ति तनावमुक्त रहता है। मानसिक रोगों के कई कारण हैं। एकल परिवार, एक-दूसरे से अपने मन की बात साझा न करना, घरेलू हिंसा, अपने आप को अलग रखना! सामाजिक बिंदु और विचारों से अपने आपको अलग रखना, जीवन और मृत्यु के नकारात्मक बिंदु के बीच अपने आप को महसूस करना, यह सब नकारात्मक विचार आदि है। इससे निजात पाने के लिए व्यक्ति को परिवार, रिश्तेदार और समाज से जुड़ा रहना चाहिए।
’एस. कुमार, लालगंज, वैशाली

किसान की दशा

सदियों से भारत कृषि प्रधान देश है, जिसमें सत्तर प्रतिशत से ज्यादा आबादी कृषि पर आश्रित है। मगर यहां छियासी प्रतिशत ऐसे किसान हैं, जिन्हें छोटा किसान माना जाता है। यानी जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम कृषि योग्य जमीन है। ऐसे किसानों की सरकार मासिक आय भी निर्धारित नहीं कर पाती है। ऐसे में इन किसानों को आए दिन नई समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है।

एक तरफ महंगाई किसानों की कमर तोड़ रही है, तो वहीं दूसरी तरफ रसायनिक खाद की कमी की वजह से किसानों को लंबी कतारों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री का पंद्रह अगस्त को लाल किले के प्राचीर से देखा हुआ सपना- छोटे किसान बनें देश की शान, कहीं न कहीं धूमिल होता नजर आ रहा है। आए दिन छोटे किसान अनाज का सही दाम न मिलने की वजह से उनमें आग लगाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में समय रहते सरकार को ऐसी समस्यायों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता हैं।
’श्याम मिश्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय

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