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नए ग्रहों की खोज

वर्तमान में वैज्ञानिकों ने धरती के समान सात नए ग्रहों का पता लगाया, जहां पर पानी और जीवन मिलने की संभावना जताई गई है।

ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव होता है। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह गणना में प्रमुख माने गए हैं। नए ग्रह जीजा, शेरान और सेरेंश की पूर्व में खोज की गई थी। वर्तमान में वैज्ञानिकों ने धरती के समान सात नए ग्रहों का पता लगाया, जहां पर पानी और जीवन मिलने की संभावना जताई गई है। ये ग्रह 40 प्रकाश वर्ष की दूरी पर एक तारे की परिक्रमा करते हैं। इन सात ग्रहों के नाम क्या रखे जाएं, यह मुद्दा अब चर्चा में है।

अब तक सौरमंडल के बाहर 3,500 ग्रहों की खोज हुई है। नए सात ग्रह सूर्य से बाह्य ग्रह की श्रेणी में आते हैं। जो ग्रह सूर्य के दायरे में माने जाने वाले आंतरिक क्षेत्र की श्रेणी में हैं, उनमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति तथा प्रभाव ज्यादा होता है। जो बाह्य श्रेणी में हैं, उनमें प्रभाव कम होता है। भविष्य में कई नए ग्रह बाह्य श्रेणी में हो सकते हैं, जिनकी खोज भविष्य में होगी और जिनका परिभ्रमण लाखों-करोड़ों साल में सौरमंडल में होता होगा।

सारांश वर्तमान में यह है कि माने गए नौ ग्रह अपना प्रभाव गुरुत्वाकर्षण के जरिए दिखाते आ रहे हैं, जिसकी गणना का खासा महत्त्व है। सूर्य से दूरी भी नए ग्रहों के प्रभाव को प्रभावित करती होगी। इसलिए भविष्य की गणना के लिए ज्योतिष में नए ग्रह सम्मिलित नहीं किए जाते होंगे। ऐसी परिस्थिति नए सात ग्रहों के साथ भी संभव होगी। खगोल विज्ञानियों ने आक्सीजन और मीथेन जैसे महत्त्वपूर्ण गैसों की खोज की है। वहां इन नए ग्रहों पर बसने के लिए जीवन के आसार की अंतरिक्ष में संभावना बन सकती है। खगोलीय घटनाओं की जानकारी ज्ञानार्जन में वृद्धि के लिए जहां आवश्यक है, वहीं शोध के लिए हर बार एक नया आधार भी बनेगा।
संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर, धार

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