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दायरे में विकास

‘शहरीकरण और नीतिगत खामियां’ (26 सितंबर) पढ़ा। हर साल बरसात आती है और हर साल शहरों में समस्याएं मुंह फाड़े खड़ी हो जाती हैं।

दायरे में विकास
सांकेतिक फोटो।

कई शहरों में लगभग हर साल बाढ़ से तबाही मचती है। सड़कें नदी बन जाती हैं। मगर इस ओर कोई ठोस काम नहीं किया जाता। आखिर कब तक यह समस्या हमारी व्यवस्था का मुंह चिढ़ाती रहेगी। अब समय आ गया है जब हमे शहरों में बाढ़ के हालात पर गंभीरता से विचार करना होगा।

जल निकासी का उचित प्रबंध किए बिना शहरी विस्तार को मंजूरी दी जाती है, अनियोजित विकास की तरफ से आंखें बंद कर ली जाती हैं। अब तात्कालिक सक्रियता से काम नहीं चलने वाला। अब दीर्घकालिक और स्थायी समाधान खोजना होगा, शहरों में पानी का इकट्ठा होने से काफी नुकसान होता है। शहरों के विकास के बजाय गांवों के विकास पर ध्यान देने से शहरों की समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

साजिद अली, चंदन नगर, मप्र

अहम सौदा

हाल ही में भारत ने आर्मेनिया के साथ रक्षा निर्यात में सौदा किया जो कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है। भारत आर्मेनिया को न केवल मिसाइल, राकेट व गोला-बारूद बेचेगा, बल्कि पहली बार भारत में डिजाइन व उत्पादित पिनाका राकेट लांचर भी देगा। साल 2020 में भी लगभग 350 करोड़ की रडार भारत आर्मीनिया को दे चुका है, लेकिन यह सौदा इससे कई गुना बढ़ा है और इसे जल्द से जल्द पूरा करने और बिचौलियों से बचने के लिए ‘सरकार से सरकार’ के रास्ते का इस्तेमाल किया गया है।

यह सौदा इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि आर्मेनिया को इन हथियारों की आवश्यकता अजरबैजान से मुकाबला करने के लिए चाहिए जो तुर्की और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत का विरोध करता रहा है। अजरबैजान ने न केवल कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का साथ दिया, बल्कि संयुक्त राष्ट्र व ओआइसी जैसी वैश्विक संस्थाओं में भी भारत के विरुद्ध खड़ा रहा है। इसलिए इस प्रकार के सौदे से न केवल भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा, बल्कि अपने विरुद्ध खड़े देशों पर लगाम लगाम लगाने में भी सहायता होगी।
पुनीत अरोड़ा, मेरठ

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First published on: 04-10-2022 at 01:35:24 am
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