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चौपाल: रक्षक प्रकृति

हम जितना प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करेंगे, उसे नुकसान पहुंचाएंगे, उतना ही हमें भुगतना पड़ेगा और भरपाई भी करनी पड़ेगी।

Author Published on: June 11, 2020 3:56 AM
प्रकृति का संरक्षण करके ही हमारा बचाव होगा।a

प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है, जिससे हमारी जिंदगी काफी सुखद रूप से बीत रही है। लेकिन प्रकृति का नियम है कि जो जीवित है, उसका एक दिन विनाश हो जाएगा, जो टिका है, वह नष्ट हो जाएगा। विकास और बदलाव तो प्रकृति की ही पद्धति है, अब वह निर्भर करता है कि बदलाव कैसा है।

हम जितना प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करेंगे, उसे नुकसान पहुंचाएंगे, उतना ही हमें भुगतना पड़ेगा और भरपाई भी करनी पड़ेगी। प्रकृति के विकराल रूप में से एक है प्राकृतिक आपदाएं, जिस पर किसी का जोर नहीं चलता और इसके घटने या आने का भी कोई निर्धारित समय नहीं होता।

बीते दिनों कई राज्य में बिना मौसम भारी बरसात हुई, जिसके कारण किसानों की फसल, उनका साल भर का भोजन खेतों में ही मिट्टी में मिल गया। लेकिन इसके लिए हम प्रकृति को दोषी ठहरा कर भी खोए हुए अनाज को वापस नहीं पा सकते। कुछ ही हफ्तों पहले बंगाल और ओड़ीशा में तूफान ने खूब तबाही मचाई, जिसकी वजह से लाखों लोगों के घर उजड़ गए, हजारों की जिंदगी भी छिन गई और सब नजरों के सामने बर्बाद हो गया। न चाह कर भी सब बेबस थे, कोई प्रकृति को रोक नहीं पाया।

इसीलिए पर्यावरण को स्वच्छ रख कर प्रकृति को फिर से हरा-भरा रखें और इसकी रक्षा भी करें। प्रकृति हमारी रक्षक बन कर खड़ी हो जाएगी। जबकि जब-जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ हुआ, तब-तब प्रकृति की प्रतिक्रिया सामने आई है और बड़ी तबाहियां हुई हैं। यह याद रख कर ही हम मानव सभ्यता की बेहतरी के लिए आगे का सफर तय कर सकते हैं।
’निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार

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