गहराता ऊर्जा संकट

विश्व के अनेक हिस्सों की तरह भारत में भी ऊर्जा की खपत बढ़ने के कारण निर्बाध आपूर्ति को लेकर आशंकाएं पैदा हो गई हैं।

india power crisis
भारत के बिजली संयंत्रों में कोयला संकट ( फाइल फोटो- रॉयटर्स)

विश्व के अनेक हिस्सों की तरह भारत में भी ऊर्जा की खपत बढ़ने के कारण निर्बाध आपूर्ति को लेकर आशंकाएं पैदा हो गई हैं। अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए आगामी दिनों में बिजली की कमी न हो, इसके लिए कुछ राज्यों में बिजली कटौती की भी खबरें हैं। बहराल, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिक चिंता की कोई बात नहीं है। विद्युत संयत्रों को पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्न किए जा रहे हैं। कुछ राज्यों ने कहा है कि संयत्रों के पास कोयले का भंडार समाप्त होता जा रहा है। केंद्र ने उन कारकों को भी रेखांकित किया है, जो इस स्थिति का कारण बने हैं। औद्योगिक और अन्य गतिविधियों में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। इसका संकेत हमें अर्थव्यवस्था की बढ़त से मिल रहा है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़ना स्वभाविक है।

मानसून के दौर में आमतौर पर कोयले की आपूर्ति प्रभावित होती है। इस बार सिंतबर में देश के बड़े हिस्से में सामान्य से बहुत अधिक बरसात ने इसे अधिक गंभीर बना दिया है। आयातित कोयले की कीमत में बढ़ोतरी भी एक बड़ा कारक है। न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थों की मांग बढ़ी है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में र्इंधन महंगे होते जा रहे हैं। चीन और यूरोप के कई देशों में तो पेट्रोल पंप से लेकर कारखाने तक आंशिक रूप कई दिनों तक बंद रहे हैं। भारत में भी पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हैं, लेकिन उनकी और कोयले की आमद बनी हुई है। हालांकि आगामी दिनों के लिए चिंताएं सामने हैं, पर हमारा देश अभी ऊर्जा के संकट से अछूता है।

अगर विद्युत संयत्रों ने मानसून के आने से पहले कोयले का समुचित भंडारण कर लिया होता, तो चिंतित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आज बिजली का प्रतिदिन राष्ट्रीय उपभोग चार अरब यूनिट से अधिक हो चुका है। इस मांग की 65 से 70 प्रतिशत आपूर्ति उन संयत्रों से की जा रही है, जो कोयले से चलते हैं। अब तक पंजाब में तीन, केरल में चार और महाराष्ट्र में तेरह ऊर्जा संयत्र कोयले की कमी से बंद हो चुके हैं। देश के एक सौ पैंतीस कोयला आधारित ऊर्जा संयत्रों में से लगभग अस्सी प्रतिशत के पास कुछ ही दिनों का र्इंधन बचा है। यह आर्थिक गतिविधियों में तो बाधा बन ही सकता है, अब से अगले पांच महीनों तक देश में उत्सवों का दौर रहेगा, इस दौरान भी मांग में उछाल आने की संभावना है। केंद्रीय ऊर्जामंत्री ने देश को आश्वस्त किया है कि स्थिति को सामान्य कर लिया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारों को परस्पर सहयोग से इस संकट का सामना करना चाहिए। राजनीतिक लड़ाई से कहीं अधिक अहम ऊर्जा की आपूर्ति बरकरार रखना है, क्योंकि इस पर संकट आने से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
’भूपेंद्र सिंह रंगा, पानीपत, हरियाणा

पढें चौपाल समाचार (Chopal News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट