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सदन की मर्यादा

सदन की सभाएं पूर्णत: आदर्श, मर्यादित, नियमानुसार और गरिमामय होना चाहिए

सदन की मर्यादा
संसद भवन (फोटो- फाइल)

हमारे सम्मानीय प्रतिनिधियों के सर्वोच्च सदन में, स्वयं उनके द्वारा दयनीय तरीके से नियमों का उल्लंघन, सदन में अनुशासन तोड़ने की पराकाष्ठा है। सांसदों का यह बचकाना आचरण पूर्णत: अवांछित और अक्षम्य है, क्योंकि देश के बहुमूल्य समय और पैसे की यह बेतहाशा बर्बादी किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती।

सदन की सभाएं पूर्णत: आदर्श, मर्यादित, नियमानुसार और गरिमामय होना चाहिए ताकि ये देश और विदेश की जनता के लिए बेहतरीन उदहारण बन सके। सदन की सभाओं का सीधा प्रसारण किया जाता है और लगभग सारी दुनिया इसे देखती है। अत: सत्तापक्ष और विपक्ष से यही अपेक्षा की जाती है कि हमारा सदन विश्व का आदर्श सदन बन सके।
इशरत अली कादरी, भोपाल</p>

गर्व का पर्व

कहावत है कि जो देश या व्यक्ति अपने पूर्व दिनों को जेहन में बनाए रखता है, वह सदैव तरक्की करता है। सरकार ने आजादी के अमृत महोत्सव को 2023 तक जारी रखने का निर्णय लिया है, जो सराहनीय है। यह आत्मनिर्भरता, नवाचार, आजादी के गुमनाम परवानों, देश की सुसंस्कृत शिक्षा, संस्कृति, अनेकता में एकता तथा मनीषियों की परंपराओं को निरंतर जीवंत रखने और लोगों के मस्तिष्क में नई विचारधारा को मथने का महोत्सव है।

इस प्रकार के राष्ट्रीय उत्सवों का उद्देश्य लोगों में ताजगी और स्फूर्ति भरना है, ताकि उनके मन में वतन को नित नई ऊंचाइयों पर ले जाने की ललक बनी रहे। इसी बहाने आजादी के बाद देश ने क्या खोया, क्या पाया पर चिंतन किया जा सकेगा। समय-समय पर ऐसे पर्व होते रहने चाहिए, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम के नायक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अमृत होते हैं। युवाओं में देश और समाज के प्रति कुछ नया करने का जज्बा पैदा करता है, जिससे देश प्रगति कर सके। अत: ऐसे महोत्सव अतीत और वर्तमान के मध्य विश्लेषण करने में भी सहायक हैं।
पवन कुमार मधुकर, रायबरेली

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