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गलत रवैया

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में जिन छात्रों को किन्हीं कारणों से सफलता नहीं मिल पाई है, उन्हें हताश होने की बजाय आगे के मौके तलाशने चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

अमेरिका ने घोषणा की है कि अगर कोई भी देश ईरान से तेल खरीदेगा या किसी भी तरह का रिश्ता रखेगा तो उसे अमेरिका से मिलने वाली सभी सुविधाएं खत्म कर दी जाएंगी। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच अभी तनाव चरम पर पहुंचा हुआ है लेकिन अमेरिका का ईरान से संबंध रखने वाले दूसरे देशों के प्रति यह रवैया बेहद गलत है। क्या सभी देशों की अर्थव्यवस्था एक जैसी होती हैं? अमेरिका को अपने व्यापार संबंधी मामलों को खुद सुलझाना चाहिए न कि अन्य देशों की मजबूरी का फायदा उठाना चाहिए। ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। भारत में वैसे ही तेल की कीमत को लेकर हर समय सरकारें घिरती रहती हैं। अमेरिका के ऐसे कदम से भारत में तेल की कीमत और भी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचेगा। इससे भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित होगा। इसलिए अमेरिका को भारत की मजबूरियां समझते हुए ईरान के साथ तेल का आयात जारी रखने देना चाहिए।

’शुभम गुप्ता, नावागढ़, धनबाद

आगे की राह

यूपी बोर्ड ने पिछले दिनों हाइस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित किया। अन्य राज्यों की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम भी कुछ ही दिनों में घोषित कर दिए जाएंगे। इन परीक्षाओं में असफल होने वाले छात्र निराश न हों। आगे भी कई अवसर हैं। संयम रखते हुए आत्मविश्वास से आगे की राह देखनी चाहिए। परीक्षा परिणाम जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकता। परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने या कम अंक आने की वजह से आत्महत्या जैसी बात तो सपने में भी नहीं सोचनी चाहिए। यह तो जीवन की एक सीढ़ी है, जिसके सहारे आगे बढ़ा जाता है। अगर किसी को सफलता किन्हीं कारणवश नहीं मिल पाई तो घबराने या हताश होने की बजाय हिम्मत से काम लेना चाहिए।

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में जिन छात्रों को किन्हीं कारणों से सफलता नहीं मिल पाई है, उन्हें हताश होने की बजाय आगे के मौके तलाशने चाहिए। असफल छात्र कंपार्टमेंटल या अगले वर्ष दोबारा परीक्षा देकर जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। असफल विद्यार्थी अपने आत्मविश्वास में कमी न आने दें। आत्मविश्वास में कमी से वे अवसाद के शिकार हो सकते हैं। इस परिस्थिति में अभिभावकों को अपने बच्चों को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि परीक्षाओं के परिणाम आने के पहले बच्चों के व्यवहार में होने वाले प्रत्येक परिवर्तन पर नजर रखें। अभिभावक अपने बच्चों को हताशा की बजाय सकारात्मकता से भर कर आगे के विकल्प तलाशने में मदद करें।
’सुशील वर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय

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