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चौपालः लापरवाही का परदा

दिल्ली हाइकोर्ट ने केजरीवाल सरकार द्वारा निजी स्कूलों में मैनेजमेंट कोटा समाप्त करने पर रोक लगा दिया।

Author February 10, 2016 3:09 AM

दिल्ली हाइकोर्ट ने केजरीवाल सरकार द्वारा निजी स्कूलों में मैनेजमेंट कोटा समाप्त करने पर रोक लगा दिया। अदालत के इस रुख के बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अच्छी शिक्षा को बढ़ावा देना सरकार की जिम्मेवारी है और इस आदेश के खिलाफ हम अपील करेंगे। यह बात समझ से परे है कि निजी विद्यालयों में मैनेजमेंट कोटा समाप्त हो जाने से शिक्षा व्यवस्था अच्छी हो जाएगी! एक ओर जहां निजी विद्यालयों में सभी संसाधन होते हैं, कक्षाए ‘स्मार्ट क्लास’ के माध्यम से ली जा रही हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चे ब्लैक बोर्ड और शौचालय जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी तरसते हैं। जहां तक गुणवत्ता से लैस शिक्षा का सवाल है, सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से बेहतर योग्य शिक्षक होने के बावजूद अच्छी तालीम देने का प्रयास नहीं किया जाता है।

केंद्र सरकार द्वारा संचालित केंद्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय और कुछ राज्य सरकारों की ओर से भी संचालित अन्य स्कूल हैं, जिनकी गुणवत्ता निजी स्कूलों से कहीं बेहतर है। जैसे बिहार सरकार द्वारा संचालित सिमतुल्ला विद्यालय। हालांकि बिहार सरकार के अन्य स्कूलों की हालत यहां के नगर निगम के स्कूलों से ज्यादा बदतर है। अमेरिका और ब्रिटेन जैंसे कई देशों के सरकारी स्कूलों में दाखिला निजी स्कूलों से कहीं अधिक होता है, क्योंकि वहां के सरकारी स्कूल, निजी स्कूलों से हर मामले में कहीं ज्यादा बेहतर संसाधनों से लैस हैं, चाहे वह गुणवत्ता का मामला हो या आधुनिक टेक्नोलॉजी से शिक्षा उपलब्ध कराने का।

आज हर व्यक्ति चाहता है कि अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी तालीम दे। एक गरीब व्यक्ति भी आधा पेट खाकर यह प्रयास करता है कि अच्छी तालीम के लिए अपने बच्चे को निजी स्कूल में ही भेजे। इस गरीब आदमी को भी दिल्ली के सरकारी स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा में विश्वास क्यों नहीं है? केजरीवाल सरकार को यह समझना चाहिए कि निजी स्कूलों में केवल मैनेजमेंट कोटा समाप्त कर देने से सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होगा। दिल्ली सरकार को सरकारी स्कूलों को हर तरह से अपग्रेड करने का प्रयास करना होगा। यह प्रयास तभी सफल होगा जब सरकार के पास दृढ़ इच्छाशक्ति होगी, क्योंकि सरकार के पास न साधनों की कमी है न संसाधन की। जिस दिन सरकारी स्कूलों की हालत बेहतर हो जाएगी, उस दिन शिक्षा में असमानता की खाई मिट जाएगी। फिर न कोई मैनेजमेंट कोटा होगा, न ही उत्कृष्टता के लिए निजी स्कूल पर निर्भरता।
रविरंजन आनंद, मुखर्जी नगर, दिल्ली

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