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समानता के बिना

आजादी के बाद समय ज्यों-ज्यों बीतता गया, समाज में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जाति और धर्म का बोलबाला बढ़ता गया। समाज में गरीब और अमीर के बीच खाई और बढ़ गई। आज गरीब की हालत यह है कि वह अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने में असमर्थ है, क्योंकि बढ़ते अंगरेजीवाद ने शिक्षा को बहुत महंगा […]

Author July 14, 2015 18:11 pm

आजादी के बाद समय ज्यों-ज्यों बीतता गया, समाज में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जाति और धर्म का बोलबाला बढ़ता गया। समाज में गरीब और अमीर के बीच खाई और बढ़ गई। आज गरीब की हालत यह है कि वह अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने में असमर्थ है, क्योंकि बढ़ते अंगरेजीवाद ने शिक्षा को बहुत महंगा कर दिया है।

दिन-प्रतिदिन हिंदी का मामला कमजोर हो रहा है। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई नहीं है, निजी विद्यालयों में शिक्षा महंगी है। शिक्षा के साथ किताबों का अंबार उसके साथ महंगी किताब, महंगी पोशाक और अन्य तरह के खर्चों ने शिक्षा को गरीब लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है।

ऐसी स्थिति में एक गरीब मजदूर या अन्य कोई कमजोर वर्ग, छोटा किसान कैसे इतनी महंगी शिक्षा दिला पाएगा। महंगाई के इस युग में गरीब लोगों को रसोई का खर्चा निकालना ही मुश्किल हो चुका है।

अगर सरकार समानता की बात करती है तो वह पूरे देश में एक तरह की शिक्षा क्यों नहीं देती है? अगर वाकई देश में समानता लानी है तो शिक्षा में समानता सबसे पहला काम है।

पहले लेखक जब पढ़ता था तो प्राथमिक विद्यालय में मात्र दस पैसे शुल्क था। आज वह स्थिति क्यों नहीं? जबकि आज सुविधाओं में काफी इजाफा हो चुका है, शिक्षा के नाम पर काफी पैसा खर्च किया जा रहा है। अगर समाज में समानता लानी है तो सबसे पहले शिक्षा में समानता लानी होगी।

उमेश चंद्र शर्मा, बुलंदशहर

 

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