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चौपाल: सतर्कता की जरूरत

भारत में कोरोना के संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अगर 135 करोड़ आबादी वाले देश में संक्रमित मरीजों की संख्या पांच सौ पार कर जाती है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति हो जाएगी। कोरोना संक्रमण के विस्तार के कारण हम आर्थिक मोर्चे पर भी बहुत पीछे जा सकते हैं।

Uber cabs restart operations in 25 cities, Uber cabs restart service in 25 cities, cab in green zone, cab service in orange zone, cab servive in red zone, Cab serive available in which zone, Coronavirus lockdown 3.0प्रतिकात्मक तस्वीर: दुनिया भर में Coronavirus से लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं।

बस एक घटना को देखें तो कोरोना के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता संदेहास्पद लगती है। गायिका कनिका कपूर एयरपोर्ट से बिना जांच के निकल गई, फिर तीन-चार पार्टियों में गई और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रही। अब उन पार्टियों में आए कुछ नामचीन लोगों ने तो खुद को पृथक कर लिया है, लेकिन उन समारोह में सहभागी बने अतिथियों की कुल संख्या आठ सौ से ज्यादा बताई जा रही है। इनमें से कई ऐसे बड़े लोग हैं, जो अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। अब ये लोग भी अपने सार्वजनिक जीवन में अन्य लोगों के संपर्क में आए हैं। इस तरह संक्रमण संभावितों की संख्या हजारों में होने का खतरा है। लेकिन इन लोगों को तलाश पाना असंभव है। इन लोगों के ड्राइवर या अन्य घरेलू नौकर और कर्मचारी भी इनके संपर्क में रहे होंगे। पार्टियों में इनके जूठे बर्तन उठाने वाले वेटर भी इनके संपर्क में आए होंगे और सफाई या अन्य कामों से जुड़े कर्मचारी भी रहे होंगे, जिनमें से अधिकतर दिहाड़ी मजदूर थे। कैटरर या अन्य सेवा प्रदाता, ठेकेदारों के माध्यम से उन्हें बुलाते हैं, उनमें से बहुत से लोगों का ब्योरा मिल पाना भी असंभव है।

भारत में कोरोना के संक्रमित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अगर 135 करोड़ आबादी वाले देश में संक्रमित मरीजों की संख्या पांच सौ पार कर जाती है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति हो जाएगी। कोरोना संक्रमण के विस्तार के कारण हम आर्थिक मोर्चे पर भी बहुत पीछे जा सकते हैं। अब जरूरत है कि हर व्यक्ति खुद को जितना हो सके समाज से पृथक कर ले, क्योंकि अब यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कोरोना का असर कितना व्यापक हो चुका है।
’सतीश भारद्वाज, मवाना, मेरठ

लापरवाही का आलम
कोरोना अब वैश्विक समस्या और महामारी बनती जा रही है। इसका खौफ सिर्फ शहरों नहीं, सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। एक तरफ लोगों को कोरोना वायरस से बचाव को लेकर जीवनरक्षक चिकित्सा सामग्री नहीं मिल पा रही है, वहीं एन-95 मास्क और पीपीई किट में लगने वाले कच्चे माल का निर्यात विदेशों में दस गुना मूल्य पर किया जाता रहा है। जबकि सरकार ने चिकित्सा से जुड़ी जरूरी सुविधाओं के निर्यात पर 31 जनवरी को ही प्रतिबंध लगा दिया था। पर 8 फरवरी को सर्जिकल मास्क और दस्ताने को प्रतिबंधित सूची से हटा दिया।

इस अधिसूचना में इसके अलावा आठ अन्य वस्तुओं को स्वतंत्र रूप से निर्यात योग्य बताया गया। जबकि डब्लूएचओ ने फरवरी में ही सभी देशों को ऐसे सुरक्षात्मक उपकरण अपने देश में जमा करने का सख्त निर्देश दिया था। यहां तक कि मास्क उद्यमियों के एसोसिएशन भी सवाल उठाते रहे कि मास्क से जुड़े कच्चे माल का लगातार निर्यात किया जा रहा है। 18 मार्च को भारत-नेपाल सीमा पर सर्जिकल मास्क, डिस्पोजल मास्क, प्लाई मास्क आदि सभी प्रकार के मास्क बनाने के कच्चे माल से भरे ट्रक जब्त हुए थे। इससे साफ है कि सरकार जीवनरक्षक वस्तुओं को लेकर कितनी संवेदनहीन है।

देश में कोरोना वायरस पूरी तरह पांव पसार चुका है। लोगों को मास्क उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे मास्क की कालाबाजारी चल रही है। यहां तक कि चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क उपलब्ध नहीं हो रहा है। जरूरत है चिकित्सकों, उनकी टीम को सुरक्षित रखने की।
’जयप्रकाश नवीन, बिहार

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