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चौपाल: बयानबाजी से बचें

यह अच्छी बात है कि सरकार ने इस तरह की बयानबाजी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कहा है कि ऐसा कोई बयान न दिया जाए, जिससे समाज में विभाजन की आशंका बढ़े। जिस बड़े संकट का सामना हम कर रहे हैं, वह अभी ठीक से सामने भी नहीं आया है। कोरोना वायरस हिंदू-मुसलिम नहीं देखता। हमें मिल कर उसका सामना करना होगा।

प्रतिकात्मक तस्वीर: Coronavirus का संक्रमण देश में तेजी से बढ़ रहा है। (Photo: Reuters)

जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं की बयानबाजी और खींचतान दुर्भाग्यूर्ण है। जबसे तबलीगी जमात के बहुत सारे लोगों के कोरोना संक्रमित होने के मामले सामने आए हैं, तभी से कुछ दल इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि सरकार ने इस तरह की बयानबाजी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कहा है कि ऐसा कोई बयान न दिया जाए, जिससे समाज में विभाजन की आशंका बढ़े। जिस बड़े संकट का सामना हम कर रहे हैं, वह अभी ठीक से सामने भी नहीं आया है। कोरोना वायरस हिंदू-मुसलिम नहीं देखता। हमें मिल कर उसका सामना करना होगा। पहले समाज और देश को बचाएं, राजनीति बाद में होती रहेगी।
’मधु कुमारी, रांची

तैयारी चुस्त हो
देश में कोरोना से पीड़ित व्यक्तियों को बचाने के लिए चिकित्सकों सहित सभी लोग एक पैर पर खड़े हैं। चिकित्सक और दूसरे कर्मी एक तरह से ईश्वर का रूप हैं, जो दिन-रात लोगों की सेवा में लगे हैं और बिना सोए, बिना छुट्टियों के काम कर रहे हैं। सरकार को भी इन लोगों का पूरा खयाल रखते हुए निजी सुरक्षा के सामान (पीपीई किट) से लेकर आवश्यक वस्तुएं तुरंत मुहैया करानी चाहिए। वहीं दूसरी ओर आम दिनों में अस्पतालों में भयंकर भीड़ होती है, जिसका कारण चिकित्सक और अस्पतालों की कमी है, जिससे कभी-कभी आम लोगों को सही समय पर सुविधा न मिल पाना, मौत का कारण भी बन जाता है। एक दिहाड़ी मजदूर एक दिन में तीन से चार सौ रुपए कमाता है और अच्छे इलाज के लिए वह चार से पांच सौ रुपए फीस लेने वाले चिकित्सक से परामर्श लेता है। हैरानी तो तब होती है जब कमीशन की जांच लिख दी जाती है और बेबस इंसान इलाज के लिए दौड़ता रहता है। ऐसे महानुभावों को यह सोचना चाहिए कि वे किस काम के लिए आए थे और क्या कर रहे हैं?
आजादी के बाद आने वाली तमाम सरकारों ने स्वास्थ्य पर काम किया है, पर अभी देश में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकों तथा अस्पतालों की कमी है। आज शायद ही कोई ऐसा मुहल्ला होगा, जहां कोई व्यक्ति बीमार न हो। इस वक्त कोरोना वायरस को मद्देनजर रखते हुए सरकार को चाहिए कि चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की कमी को जल्द से जल्द पूरा करे।
’हर्षवर्धन सिंह चौहान, रायबरेली

उपयोगकर्ता सजग रहें
सोशल मीडिया में वाट्स ऐप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, टिकटाक आदि पर कोरोना संबंधी काफी जानकारियां प्रतिलिपि बना कर अग्रसारित की जा रही हैं। बंदी में घरों में बैठे लोग मोबाइल मैनिया से इतने ग्रसित हो गए हैं कि वे पीछे से आ रही कोरोना संबंधी आॅडियो-वीडियो, कार्टून आदि सामग्री को बार-बार प्रतिलिपि बना कर अग्रसारित कर रहे हैं। इससे अपुष्ट सूचनाओं का सैलाब आता है। इससे मोबाइल उपयोगकर्ता की काफी ऊर्जा इसी में नष्ट हो रही है। हालांकि सोशल मीडिया पर लगाम लगाने के लिए केंद्र, राज्य सरकारों ने आईटी एक्ट और एपेडेमिक एक्ट बना दिया है, जिसमें गलत, अपुष्ट सूचनाओं और अफवाह को अग्रसारित करने पर सजा का प्रावधान किया गया है। पर उससे ज्यादा सजगता स्वयं मोबाइल उपयोगकर्ता को रखनी होगी। किसी भी अपुष्ट जानकारी को दूसरे वाट्सऐप समूह में भेजने से बचा जाए।
’युगल किशोर शर्मा, खांबी, फरीदाबाद

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