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चौपालः जल का प्रबंध

इस साल की बारिश से काफी जानमाल का नुकसान हुआ है। सरकारी लागत से बनी लाखों-करोड़ों रुपए की सड़क, पुल, पटरियां तक जल समाधि में लीन हो गर्इं।

Author August 2, 2018 3:30 AM
प्रतीकात्मक चित्र

इस साल की बारिश से काफी जानमाल का नुकसान हुआ है। सरकारी लागत से बनी लाखों-करोड़ों रुपए की सड़क, पुल, पटरियां तक जल समाधि में लीन हो गर्इं। हर सरकार बारिश से पहले पानी की निकासी, आश्रय स्थलों का निर्माण, बिजली-पानी सीवर, संचार जैसी व्यवस्थाओं के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपए का बजट रखती हैं। यहां तक कि केंद्र से अलग राज्य और जिलों में भी प्रबंध की सरंचना तैयार की जाती है, लेकिन बारिश या बाढ़ में प्रबंध बहता नजर आता है। इसका प्रमुख कारण है कि योजनाओं को मूर्त रूप नहीं दिया जाता है।

बारिश के बाद मलेरिया, डेंगू जैसी महामारी फैलने के लिए सुरक्षा इंतजाम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिहार के अस्पताल में आईसीयू में जलभराव हो गया। ऐसा लगता है कि जल संचय और बारिश के पानी के सदुपयोग के बारे में सरकारों ने कभी विचार किया ही नहीं। कई जगहों पर जो आबादी महीने भर पहले पीने के पानी के लिए परेशान थी, आज उन्हीं इलाकों में बारिश का लाखों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। अगर बारिश के पानी को संचय करें तो न केवल खेती, बल्कि ज्यादातर आबादी को पीने के पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। पुराने तालाब, जलाशय, बावड़ी, खत्म होने की कागार पर हैं।

माना कि प्रकृति आपदाएं बता कर नहीं आती हैं, लेकिन मौसम विभाग की लगातार चेतावनी के बाद कदम नहीं उठाना घोर लापरवाही की तरफ इशारा करता है। जलभराव, बाढ़ जैसी आपदा के वक्त नेता हेलीकॉप्टर से दौरे कर रस्म अदायगी करते हैं। अगर सरकार वाकई जनता की समस्या जान कर कार्य करना चाहती है तो जमीनी हालात को बदलने का प्रयास करना होगा।

’महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

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