कांग्रेस की नैया

कांग्रेस शासित राज्य पंजाब में इन दिनों सियासी घमासान चल रहा है।

चरणजीत सिंह चन्नी। फाइल फोटो।

कांग्रेस शासित राज्य पंजाब में इन दिनों सियासी घमासान चल रहा है। घर की लड़ाई उसके लिए दुखदाई साबित हो रही है। कांग्रेस लगातार हर राज्य में पतन की ओर बढ़ती जा रही है। पर कांग्रेस नेताओं का सत्ता के प्रति मोह छूट नहीं रहा, जिसके चलते हर राज्य में अंदर ही अंदर लड़ाई चरम पर चल रही है।
पंजाब घटनाक्रम के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का बयान गौर करने लायक है। उन्होंने जिस तरह खुल कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है, उस पर पार्टी के आला नेताओं को चिंतन करना चाहिए। आज कांग्रेस में कोई सशक्त नेतृत्व नहीं है और न ही अनुशासन नाम की कोई चीज दिखाई दे रही है। नेतृत्वकर्ता को पार्टी की दयनीय स्थिति की कतई चिंता नहीं है, जिससे किसी समय देश की सबसे बड़ी पार्टी रही आज रसातल की ओर जाती दिख रही है।

दरअसल, कांग्रेस में नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकतर नेता ऐसे हैं, जो एक परिवार की चाटुकारिता से मुक्त होना ही नहीं चाहते हैं। अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व को पार्टी की दयनीय स्थिति से ईमानदारी से वाकिफ करवा कर सही आईना दिखाएं तो कांग्रेस फिर अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है। कांग्रेस नेतृत्व की लाचारी और नादानी से आज भाजपा को निश्चित रूप से बगैर मेहनत के फल मिल रहा है। अगर अब भी कांग्रेस ने अपने पुराने अनुभवी नेताओं की बातों को अमलीजामा नहीं पहनाया, तो उसे आने वाले समय में और अधिक हंसी का पात्र बनना पड़ेगा और धीरे-धीरे छोटे से लेकर बड़े कार्यकर्ता तक अन्य पार्टियों में भागते चले जाएंगे।

कांग्रेस कन्हैया के भरोसे कभी मजबूत नहीं बन सकती। जो देश का नहीं हो सकता वह कांग्रेस का क्या होगा? मगर यह बात कांग्रेस समझ नहीं पाई, क्योंकि कांग्रेस पर कन्हैया का चश्मा जो चढ़ा है। कन्हैया जैसे नेताओं को कांग्रेस में शामिल करने के बजाय अगर जो कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं, उन्हें सम्मान दिया जाए तो आज ऐसे लोगों को पार्टी में लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। मगर शायद कांग्रेस कन्हैया के सहारे अपनी पार्टी के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करवाना चाहती है।
’शिरीष सकलेचा, रतलाम

फर्जी पर नकेल जरूरी

पिछले काफी समय से देखने में आ रहा है कि फर्जी सूचनाएं यानी फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने वाली टिप्पणियां तेजी से देश में पांव पसार रही हैं। सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं द्वारा गफलत फैलाने पर सरकार को कोई कड़ा अंकुश लगाना चाहिए। कुछ न्यूज चैनल और अखबार फेक न्यूज की सच्चाई उजागर करते जरूर हैं, पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, क्योंकि आजकल संचार माध्यम इतने तीव्र, शक्तिशाली और तीक्ष्ण हो गए हैं कि पलक झपकते ही दुनिया भर में खबरें पहुंच जाती हैं।

भले बाद में खंडन आ जाए, पर उस वक्त तो वह दुष्प्रभाव डाल ही देती है। यह देशहित में कतई ठीक नहीं है। इसलिए सरकार को फेक न्यूज और सोशल मीडिया पर अहितकारी, अनर्गल या झूठी खबरें फैलाने वालों पर राष्ट्रहित और जनहित में सख्ती बरतनी चाहिए, ताकि सोशल मीडिया का दुरुपयोग रुक सके और फेक न्यूज बंद हो सके।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

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