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चौपाल : सियासी अवसरवाद

बुजुर्ग हो चुके नेता सम्मान के पात्र होते हैं। जवानी के दिनों में विरोधी के प्रति चाहे कितनी ही तल्खी रही हो पर बुढ़ापे में नरम होकर सबका सम्मान पाते हैं।
Author नई दिल्ली | June 1, 2016 06:01 am
पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा। (PTI File Photo)

बुजुर्ग हो चुके नेता सम्मान के पात्र होते हैं। जवानी के दिनों में विरोधी के प्रति चाहे कितनी ही तल्खी रही हो पर बुढ़ापे में नरम होकर सबका सम्मान पाते हैं। आगामी राज्यसभा चुनाव ऐसे में काफी अलग होगा। यहां दो बुजुर्ग वानप्रस्थ में अपनी-अपनी पार्टियों को लंगड़ी मार सियासी अवसरवाद की पराकाष्ठा पार कर रहे हैं। पहले हैं कांग्रेस से टूटे बेनी प्रसाद वर्मा तो दूसरे देश के जानेमाने वकील और भाजपा के वरिष्ठ नेता राम जेठमलानी, जो अब जीवन के अंतिम पड़ाव में क्रमश: सपा और राजद के लिए देश के उच्च सदन में तकरीरें करते दिखेंगे। जीवन भर की अपनी लड़ाई और संघर्षों के बाद आखिर वे कौन से मुद्दे छूट गए थे जिन्हें उठाने के लिए दोनों बुजुर्गों को इस उमर में मौकापरस्ती की छलांग लगानी पड़ी, देश जानना चाहेगा।

अंकित दूबे, जनेवि, दिल्ली

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