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चौपाल: युवा नेताओं की उपेक्षा

कांग्रेस नेतृत्व पिछले पांच साल से ज्योतिरादित्य सिंधिया को नजरअंदाज करता आ रहा था। एक ओर पहले तो कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इस युवा नेता को कोई सम्मानजनक पद नहीं दिया, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में हुए चुनावों में सिंधिया ने दिन-रात कांग्रेस के लिए प्रचार किया, फिर भी उपेक्षा मिली।

Jyotiraditya Scindiaज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

कांग्रेस के लिए वर्षों से वफादार रहे सिंधिया परिवार के उत्तराधिकारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीते दिनों कांग्रेस को छोड़ भाजपा की सदस्यता ले ली। इसी के साथ कांग्रेस की युवाओं के प्रति बेरुखी भी जगजाहिर हो गई। कांग्रेस नेतृत्व पिछले पांच साल से ज्योतिरादित्य सिंधिया को नजरअंदाज करता आ रहा था। एक ओर पहले तो कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इस युवा नेता को कोई सम्मानजनक पद नहीं दिया, दूसरी तरफ मध्यप्रदेश में हुए चुनावों में सिंधिया ने दिन-रात कांग्रेस के लिए प्रचार किया और कांग्रेस ने जनता के सामने चुनाव के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से सिंधिया को ही मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए रखा। चुनाव के नतीजे आए कांग्रेस को बहुमत मिला, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने जनभावनाओं के विपरीत जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया।

इसी तरह से राजस्थान में भी विधानसभा के चुनाव में वहां के लोकप्रिय युवा कांग्रेसी नेता सचिन पायलट ने जम कर प्रचार किया और पार्टी ने उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए रखा था। लेकिन जैसे ही राजस्थान चुनाव नतीजों में कांग्रेस सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी, तो आश्चर्यजनक रूप से अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद दे दिया गया। हालांकि राजस्थान में सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद देकर शांत किया गया।

वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को अपने युवा नेताओं को दरकिनार करने की नीति पर पुनर्विचार करना होगा। जिस प्रकार से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के द्वारा युवाओं की दरकिनार किया जा रहा है, वह कांग्रेस के भविष्य के साथ-साथ भारत के लोकतंत्र के भविष्य के लिए भी सही नहीं है। फिलहाल अभी भी कांग्रेस में रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, मनीष तिवारी जैसे बहुत से युवा नेता हैं। अगर शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते युवा नेताओं को तवज्जो नहीं दी तो जल्दी ही कांग्रेस युवामुक्त हो जाएगी।
’आकाश सिंह, इलाहाबाद विवि, प्रयागराज

संकीर्णता की राजनीति
भारत के पिछले कई दशकों से जाति और धर्म की राजनीति का दौर जारी है। भेदभाव सदियों से हमारे देश में पनपता रहा है और इसी को खत्म करने के लिए संविधान निर्माताओं ने आरक्षण की व्यवस्था को शामिल किया था। परंतु क्या पता था कि आरक्षण महज कमजोर वर्ग की प्रगति के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ राजनेताओं द्वारा अपनी राजनीति की प्रगति के लिए प्रयोग किया जाएगा। पहले राजनीति राष्ट्रहित में समर्पित थी, लेकिन अब देश के हालात बिगड़ चुके हैं और धर्म व जाति की राजनीति हावी है।

जाति, वर्ग या धर्म सिर्फ इंसान को बांटने का काम करते हैं जिसका लाभ राजनेता उठाते रहे हैं। लोगों को समझना होगा कि राजनीति किसी वर्ग या जाति की सगी नहीं होती, न ही किसी धर्म या जाति तक सीमित रहती है। इसलिए समाज को सही और समझदार तरीके से फैसले करने की जरूरत है।
’सिमरन, देहरादून

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