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रेलवे का हाल

मैंने रतलाम से नई दिल्ली स्वराज एक्सप्रेस से 24.11.14 को यात्रा की थी। मेरा पीएनआर नं 822-9859894 है। यह टिकट एसी-3 का है। इसके लिए 1075 रुपए का पूरे शुल्क का भुगतान किया था। मैंने 13.11.14 को टिकट बुक कराया था जो वेटिंग 4 नंबर पर था। 24 नवंबर तक भी वह कन्फर्म नहीं हुआ, […]

मैंने रतलाम से नई दिल्ली स्वराज एक्सप्रेस से 24.11.14 को यात्रा की थी। मेरा पीएनआर नं 822-9859894 है। यह टिकट एसी-3 का है। इसके लिए 1075 रुपए का पूरे शुल्क का भुगतान किया था। मैंने 13.11.14 को टिकट बुक कराया था जो वेटिंग 4 नंबर पर था। 24 नवंबर तक भी वह कन्फर्म नहीं हुआ, इसलिए बी-3 के टीटीई को पांच सौ रुपए देकर बर्थ ली। मुझे बी-3 में 33 नंबर बर्थ दी गई। बी-3 के कोच के चारों बाथरूम में पानी नहीं था। बाहर की बेसिन में भी नहीं था।

एसी-3 का पूरा शुल्क अग्रिम लेने के बावजूद एक यात्री की मूलभूत सुविधाओं से मुझे वंचित क्यों किया गया? अगर कोच में पानी नहीं था तो दूसरा कोच क्यों नहीं लगाया गया? मुझे जो परेशानी हुई उसके लिए कौन जिम्मेदार है? अगर आगे से भी मेरे जैसे निर्दोष यात्रियों के साथ भारतीय रेलवे ऐसा बर्ताव करती रही तो हम निर्दोष यात्रियों के मूल अधिकार क्या हैं? ऐसे में क्या हमें भारतीय रेलवे से यात्रा करना छोड़ देना चाहिए?

अगर एसी-3 कोच में पानी नहीं है तो जनरल या स्लीपर कोच की हालत का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसी दशा में देश के प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान का क्या पालन होगा? क्या भारतीय रेलवे ऐसे ही गंदे बाथरूम लेकर चलती रहेगी? विदेशी यात्री हमारे देश की क्या छवि लेकर जाएंगे?

’राजेंद्र उपाध्याय, नई दिल्ली

 

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