चौपाल: मिलावट का धंधा

खाने-पीने में मिलावट की शिकायत कोई नई नहीं है। मगर सरकार के लचर रवैये, कमजोर कानून और राजनीतिक-प्रशासनिक सांठगांठ की वजह से मिलावटखोरी का दौर बढ़ता ही गया। कभी-कभी खुलासा होने पर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है।

adulterationखाद्य पदार्थों में मिलावट।सांकेतिक फोटो।

खाने-पीने में मिलावट की शिकायत कोई नई नहीं है। मगर सरकार के लचर रवैये, कमजोर कानून और राजनीतिक-प्रशासनिक सांठगांठ की वजह से मिलावटखोरी का दौर बढ़ता ही गया। कभी-कभी खुलासा होने पर जांच के नाम पर खानापूर्ति कर दी जाती है। कुछ छोटे कारोबारियों की गिरफ्तारी होती है, लेकिन सफेदपोश कानून की गिरफ्त से बच जाते हैं और मिलावटखोरी का धंधा फलता-फूलता रहता है।

मिलावटी शहद ने इस बात को सिद्ध कर दिया है कि अब बड़ी कंपनियां भी अधिक लालच के लिए मिलावटखोरी के खेल में जुड़ गई हैं। पैसों की लालच में लोगों को मौत में मुंह में धकेला जा रहा है। लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। अनगिनत लोग असमय ही मौत को गले लगा रहे हैं। इसके विरुद्ध सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए और इस समस्या को जड़ से समाप्त करना चाहिए, क्योंकि यह लोगों की जिंदगी का सवाल है।
’हिमांशु शेखर, केसपा, गया, बिहार

जश्न के बरक्स

आजकल शादियों का मौसम चल रहा है। हर जगह वैवाहिक कार्यक्रम हो रहे हैं। कार्यक्रमों की सुचारु व्यवस्था के लिए बाहरी लोगों को काम पर बुलाया जाता है। टेंट वाले, डीजे, हलवाई, रसोई बनाने वाले आदि हर शादी में नजर आते है और आमतौर पर हम उनके साथ दुर्व्यवहार होते हुए देखते हैं। शादी-ब्याह के जश्न में हम यह भूल जाते हैं कि जिन लोगों को हमने पैसे देकर काम पर बुलाया है, वे हमारी खुशी सुनिश्चित करते हैं और वे भी हमारी तरह इंसान ही हैं।

अक्सर देखा जाता है कि लोग टेंट के बिस्तरों को बुरी तरीके से प्रयोग करते हैं और उम्मीद करते हैं कि टेंट वाला हमें हर बार नए बिस्तर ही दे। उसी तरह दूसरे काम पर आए लोगों के प्रति हीन बर्ताव साफ नजर आता है। उनके न तो खाने का ध्यान दिया जाता और न ही सोने का। अपने मनोरंजन के लिए हम न जाने कितने लोगों के साथ बुरा बर्ताव कर बैठते हैं। आधुनिकता के इस बढ़ते युग में हमें मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने की आवश्यकता है।
’शिवम सिंह , बबेरू, बांदा, उप्र

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