जलवायु प्रतिज्ञा

ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में विश्व के नेताओं ने इस दशक के अंत तक वनों की कटाई को रोकने और प्रदूषण के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए अपना-अपना योगदान देने, विनाशक गैस मीथेन के उत्सर्जन को कम करने का संकल्प लिया है।

सांकेतिक फोटो।

ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में विश्व के नेताओं ने इस दशक के अंत तक वनों की कटाई को रोकने और प्रदूषण के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाने के लिए अपना-अपना योगदान देने, विनाशक गैस मीथेन के उत्सर्जन को कम करने का संकल्प लिया है। सभी राष्ट्रों को यह समझना होगा कि वे प्रतिस्पर्धी दौड़ में नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी से जीवन के विनाश को बचाने के लिए घड़ी से आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में घोषणा की कि भारत कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने गैर-जीवाश्म र्इंधन ऊर्जा उत्पादन क्षमता को पांच सौ गीगा वाट तक बढ़ाने का वादा किया, ऊर्जा आवश्यकता का पचास फीसद नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पन्न करने का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूरा किया जाएगा। अगर यह प्रयास सफल होता है तो भारत जलवायु परिवर्तन से लड़ने और सतत विकास सुनिश्चित करने में एक वैश्विक उदाहरण होगा।

यह भी आशा की जाती है कि भारतीय प्रतिबद्धताएं अन्य देशों को भी उनके द्वारा इस दिशा में किए गए समान वादों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेंगी, विशेष रूप से वे विकसित देश, जो विकासशील देशों को सहायता देने के अरबों डालर के वादों को पूरा करने में पिछड़ गए हैं। जलवायु परिवर्तन के मामले में सभी देशों को यह याद रखना होगा कि वे एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं, बल्कि जलवायु प्रदूषण से न ठीक हो पाने वाले परिवर्तन से आगे निकलने के लिए एक साथ प्रयास कर रहे हैं।
’परमवीर ‘केसरी’, मेरठ

नतीजों के संकेत

हाल ही में विभिन्न राज्यों में लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव संपन्न हुए। उनके परिणाम आने के पश्चात इस बात के साफ संकेत मिलने से प्रारंभ हो गए कि मौजूदा सरकार अगर आगामी 2024 के चुनाव में बिना तैयारी के मैदान में आएगी तो उसके लिए खतरे से खाली नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का शासन है और वहां पर सभी सीटों पर कांग्रेस ने विजय हासिल की है।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस करारी हार के लिए महंगाई को पूर्ण रूप से दोषी ठहराया है। चिंता की बात है कि जो लोकसभा की सीट 2017 में लाखों वोटों से भारतीय जनता पार्टी ने जीती थी, वह अब कांग्रेस ने जीत ली है और वहां हुए विधानसभा चुनाव में भी मौजूदा सरकार को पराजय का सामना करना पड़ा है। इसी तरह पश्चिम बंगाल में उसे एक भी सीट हाथ नहीं आई।

केवल मध्यप्रदेश के खंडवा की लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के पाले में गई है। वहां विधानसभा की सीटों पर भी उसकी लाज बच गई है। मगर अन्य राज्यों में उसकी स्थिति बुरी ही रही है। इस तरह अंदाजा लगाया जाने लगा है कि आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी मतदाता का गुस्सा जाहिर होना प्रारंभ होगा।

दरअसल, लंबे समय से बेरोजगारी और बढ़ती हुई महंगाई की मार ने मतदाताओं को इस प्रकार से अपने विचार बदलने को बाध्य किया है। भले सत्तारूढ़ दल कोई भी दावा करे, लेकिन इस बात के साफ और स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में अगर बगैर तैयारी के सत्तारूढ़ दल चुनाव मैदान में जाता है तो उसको बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
’विजय कुमार धानिया, नई दिल्ली

पढें चौपाल समाचार (Chopal News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

Next Story
लक्ष्य से दूर
अपडेट