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चौपालः स्वच्छता के सरोकार

प्रधानमंत्री ने राजघाट से 2 अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी और लक्ष्य रखा गया कि बापू की 150 वीं जयंती यानी 2019 तक भारत को पूरी तरह स्वच्छ करना है।

Author August 6, 2018 3:20 AM
एक ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक 80 फीसद से ज्यादा लोग कहते हैं कि उनके आसपास हर साल वर्षा में काफी पानी जमा हो जाता है।

प्रधानमंत्री ने राजघाट से 2 अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी और लक्ष्य रखा गया कि बापू की 150 वीं जयंती यानी 2019 तक भारत को पूरी तरह स्वच्छ करना है। इसमें कोई शक नहीं कि 2014 के बाद भारत में स्वच्छता को लेकर काफी जागरूकता आई है और लोग इसमें रुचि भी ले रहे हैं। लेकिन हमें लगता है कि स्वच्छता अभियान में जल निकासी व्यवस्था यानी ‘ड्रेनेज सिस्टम’ को अपेक्षित तवज्जो नहीं दी गई। पिछली कई सरकारों ने भी इस विषय पर ध्यान नहीं दिया था। परिणामस्वरूप जब बीते दिनों देश की राजधानी दिल्ली में केवल एक घंटे की वर्षा हुई तो वह जलमग्न हो गई। ऐतिहासिक मिंटो ब्रिज के पास जल भराव के कारण बस डूब गई। सचिवालय भी इसकी चपेट में आ गया। जब देश की राजधानी का यह हाल है तो दूसरे छोटे शहरों की हालत क्या होगी इसका अंदाजा हम खुद लगा सकते हैं। इसका संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा कि मीडिया में आई रिपोर्टों से तो लगता है कि यह हालत दिल्ली की नहीं बल्कि दूरदराज के किसी जनजाति इलाके की है!

यही हाल हमारी वाणिज्यिक राजधानी मुंबई का भी है। पिछले दिनों मुंबई के कई इलाके पानी-पानी हो गए। यानी बरसाती पानी के सामने ड्रेनेज सिस्टम ने घुटने टेक दिए। विधानसभा तक में पानी चला गया। लगता है कि 12 साल पुरानी 2005 की बाढ़ की घटना भुला दी गई है जिसमें 850 लोगों की जान गई थी। यानी उस घटना से कोई सबक नहीं लिया गया। उसी का परिणाम है कि आज चंद घंटों की बारिश में मुंबई शहर पानी-पानी हो जाता है और जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल जाती है। स्वच्छता अभियान में जिन विषयों को रख कर काम चल रहा है उनमें जल निकासी व्यवस्था को अवश्य शामिल करना चाहिए। यह व्यवस्था दो प्रकार की होती है। एक में नाले व नालियां आती हैं और दूसरे में बंद पाइप। हमारे देश में प्रतिदिन लाखों टन कचरा उत्पन्न होता है और उसका सही ढंग से उपचार किए बिना ही लोग नदी-नालों में फेंक देते हैं।

एक ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक 80 फीसद से ज्यादा लोग कहते हैं कि उनके आसपास हर साल वर्षा में काफी पानी जमा हो जाता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक 38 फीसद भारतीयों के पास सेप्टिक टैंक व 33 फीसद के पास ड्रेनेज सीवर सिस्टम नहीं है। इसके लिए शौचालय में सब्सिडी के अलावा ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए सेप्टिक टैंक व वाटर हारवेस्टिंग टैंक लगाने के लिए सरकारी अनुदान दिया जाना चाहिए। इनके इस्तेमाल से जल संग्रहण भी होगा और प्रवाह तंत्र को भी काफी मजबूती मिलेगी। सरकारी तंत्र को जनसंचार माध्यमों, कार्यशालाओं आदि के जरिए लोगों को जागरूक बना कर जनता तक इन सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रयत्न करना चाहिए ताकि जिन समस्याओं को हम आज झेल रहे हैं उन्हें आने वाले दिनों में न झेलें और हमारा विकास सही ढंग से हो पाए। तभी स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य पूरी तरह से प्राप्त होगा।

’शिवेंद्र तिवारी, रीवा, मध्यप्रदेश

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