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चौपालः झील की दुर्दशा

गढ़मऊ झील लगभग चौदह किलोमीटर लंबी झील है। यह झांसी शहर से बारह किलोमीटर दूर है। इस झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की जरूरत है, ताकि यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

Author Updated: February 27, 2020 1:27 AM
गढ़मऊ झील झांसी

गढ़मऊ झील लगभग चौदह किलोमीटर लंबी झील है। यह झांसी शहर से बारह किलोमीटर दूर है। इस झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की जरूरत है, ताकि यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। पर आजकल यह झील और इसके आसपास के इलाके नशेड़ियों का अड्डा बना चुके हैं। इसके अलावा झील भी गंदी होती जा रही है। झील के चारों ओर पॉलिथीन और शराब की टूटी हुई बोतलें देखने को मिल जाएंगी। झील के आसपास काई भी जमा हो गई है, जिस कारण झील का स्वरूप बिगड़ गया है। स्थानीय प्रशासन और उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से मेरा अनुरोध है कि गढ़मऊ झील को जल्द से जल्द विकसित करने पर ध्यान दे।

हालांकि इस झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन विभाग ने 806.16 लाख रुपए का प्रस्ताव बना कर केंद्र सरकार को भेजा था, जिस पर केंद्र ने 586.23 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस राशि से झील में नौका विहार, पहाड़ियों पर रोप वे समेत अन्य कार्य कराए जाने हैं। झील का सौंदर्यीकरण मुख्यमंत्री की घोषणाओं में भी शामिल है। इस कारण शासन स्तर पर तेजी से कार्य होना चाहिए था, लेकिन अभी तक धरातल पर कुछ होता नहीं दिख रहा।
’संतोष कुमार, बुंदेलखंड विवि, झांसी

दिल्ली में हिंसा
देश में भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने और इसमें हुई मौतों ने देश ही नहीं, दुनिया में भी भारत की उस छवि को भी नुकसान पहुंचाया है जो महात्मा गांधी के अहिंसक भारत के रूप में बनी हुई है। माना कि अपना मत रखने और अहिंसक तरीके से आंदोलन का हर आदमी को अधिकार है, मगर दूसरों के जान-माल की कीमत पर हिंसा और आगजनी कहां तक उचित है? आम लोगों और पुलिसकर्मियों की मौतों के बीच जिस तरह से इस घटना का राजनीतिकरण हो रहा है, वह भी दुखदाई है।

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