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चौपालः समय के साथ

समय की गति न्यारी है और इसी वजह से समय को सृष्टि में सबसे अनुपम और बलवान माना गया है।

Author June 9, 2017 3:09 AM
सांकेतिक फोटो

समय की गति न्यारी है और इसी वजह से समय को सृष्टि में सबसे अनुपम और बलवान माना गया है। जब समय यानी वक्त बदलता है तो इंसान को राजा से रंक और रंक से राजा बना देता है। दोस्त दुश्मन और दुश्मन दोस्त बन जाते हैं। समय के कहर से बड़े-बड़े राजा-महाराजा तक घबराते हैं। कहा जाता है कि समय एक अच्छा चिकित्सक भी है। यह बड़े से बड़े घाव को भरने में सक्षम है। तभी तो कहते हैं, ‘जिंदगी चार दिन की है, दो दिन आपके हक में और दो दिन आपके खिलाफ! जिस दिन हक में हो तो गुरूर मत कीजिए। जिस दिन खिलाफ हो तो थोड़ा सब्र जरूर कीजिए क्योंकि समय बड़े से बड़ा घाव तक भर सकता है।’
यों, समय को सच्चाई के पिताश्री की संज्ञा भी दी गई है क्योंकि समय सभी चीजों को परिपक्व कर देता है। दूसरे शब्दों में, समय के साथ सभी चीजें उजागर हो जाती हैं। समय कुछ भी बदल सकता है पर किसी के लिए कभी रुकता नहीं है। कहते हैं, आदमी अच्छा या बुरा नहीं होता बल्कि उसका समय अच्छा और बुरा होता है। जब समय अच्छा चल रहा होता है तो सब काम अपने आप अच्छे हो जाते हैं, लेकिन ‘खराब समय’ शुरू होने के बाद बनते काम भी बिगड़ने लगते हैं। समय को एक अच्छा अध्यापक भी माना गया है। यह हमें हमेशा सिखाता रहता है। स्कूल में हमें सीखने के बाद परीक्षा देनी पड़ती है लेकिन समय हमारी पहले परीक्षा लेता है और फिर सिखाता है।
कहने का तात्पर्य यह कि समय महाबली है और वह उचित-अनुचित की पूरी खबर रखता और समय आने पर ‘काल के कठघरे’ में सबको खड़ा कर देता है। अज्ञानी लोग काल की इस चाल को समझते नहीं हैं। जिस दिन समझेंगे उस दिन से कोई भी बुरा काम नहीं करेंगे। राजनीति में तो समय की अहम भूमिका रहती है। पिछले दो-तीन वर्षों का इतिहास इसका गवाह है।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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