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चौपाल: सड़क पर सुरक्षा

वाहन चलाते समय सुरक्षा उपायों, जैसे- हेलमेट, सीट बेल्ट, पॉवर स्टेयरिंग और सड़क सुरक्षा जागरूकता से संबंधित अभियान पर जोर दिया, लेकिन इसमें मामूली अंतर ही आ पाया।

Author January 14, 2019 6:39 AM
चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है। (File Photo : PTI)

यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रतिवर्ष 11 से 17 जनवरी तक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है। तेज रफ्तार, शराब पीकर गाड़ी चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी जैसे कारण दुर्घटनाओं के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं के लिए प्रशासन भी उतना ही जिम्मेदार है, जितने कि वाहन चालक। ठेकेदारों द्वारा प्रयोग घटिया सामान भी खराब सड़कों का बड़ा कारण है। खराब सड़कों के कारण देश में हर एक मिनट में बाइस सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इसके अलावा सड़कों पर बढ़ते वाहन भी दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में 78.7 प्रतिशत दुर्घटनाएं चालकों की गलती से होती हैं। जब वाहन चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करेंगे, नशे में वाहन चलाएंगे, वाहन चलाते हुए मोबाइल पर बात करेंगे, तो सड़कें जानलेवा बन ही जाएंगी।

वाहन चलाते समय सुरक्षा उपायों, जैसे- हेलमेट, सीट बेल्ट, पॉवर स्टेयरिंग और सड़क सुरक्षा जागरूकता से संबंधित अभियान पर जोर दिया, लेकिन इसमें मामूली अंतर ही आ पाया। ऐसे में आज यह बड़ी समस्या बनती जा रही है, लोगों में धैर्य की कमी और जल्दी के चलते वह मौत का जोखिम लेने से भी नहीं डर रहे हैं। कई बार तो लोग इतने संवेदनहीन हो जाते हैं कि सड़क पर किसी को मारने के बाद गाड़ी की स्पीड बढ़ाकर वहां से भागने में ही भलाई समझते हैं। ऐसे में सरकार को सड़क दुर्घटना से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलानी होंगी और राज्य सरकारों को लोगों को यातायात के नियम के प्रति जागरूकता फैलाने का काम करना होगा।
’सुनीता मिश्रा, नई दिल्ली

आरक्षण के पात्र
गरीब सवर्णों के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों से ही दस फीसद आरक्षण के लिए मुहर लग चुकी है। यह आरक्षण उन लोगों को दिया जाएगा जिनकी सालाना आय आठ लाख से कम है या जिनके पास कृषि भूमि पांच हेक्टेयर से कम है या जिनका घर सौ गज से कम आकार का है। पर सवाल है कि क्या यह आरक्षण कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा? शिक्षा और नौकरियों में दस फीसद आरक्षण की व्यवस्था ठीक वैसे ही लगती है, जैसे किसी एक रोटी में से और दस फीसद टुकड़ा अलग से रख दिया हो। आरक्षण की शर्तें लगभग सभी सवर्णों को इसके दायरे में लाती हैं। दस फीसद आरक्षण में कोई बुराई नहीं है, पर यहां विचारणीय है कि अब भी आरक्षण सभी सवर्णों में पहले जैसे ही प्रतियोगिता रखेगा। इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं, फिर बेशक वे मुसलिम हों, हिंदू हों या फिर अन्य किसी धर्म वाले क्योंकि दी गई शर्तें सभी सवर्णों को दस फीसद आरक्षण में शामिल करती हैं। वैसे आठ लाख सालाना आय या फिर सौ गज मकान का मालिक सवर्ण गरीब नहीं हो सकता। असल में गरीब सवर्ण तो वह है जिसकी सालाना आय दो से तीन लाख हो और वह अपना बसर किसी किराए के या छोटे मकान में कर रहा हो। अगर सरकार को जनता की भलाई करनी ही थी तो आरक्षण ऐसे लोगों के लिए ही लाना चाहिए था।
’प्रिंस शर्मा, दिल्ली विवि

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