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चौपाल: छवि पर दाग

पिछले दिनों हरियाणा के रेवाड़ी में बारहवीं की टॉपर छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। इसकी पीड़िता वही लड़की थी जिसे दसवीं कक्षा में टॉप करने पर प्रधानमंत्री ने खुद सम्मानित किया था।

Author September 24, 2018 6:08 AM
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर (फाइल फोटो)

चंद वर्षों पहले तक हरियाणा देश को नए खिलाड़ी देने, बेहतर समाज बनाने और भाईचारे को बढ़ावा देने वाले राज्य के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज तस्वीर बिल्कुल इसके उलट होती जा रही है। इन दिनों हरियाणा के बहुत से युवा नशा करके सेना भर्ती की दौड़ में पकड़े जाते हैं। यहां आरक्षण की मांग को लेकर चला जाट आंदोलन भाईचारे के सभी पैमानों को तोड़ कर आगे निकल गया। हाल ही में वायुसेना की लिखित परीक्षा में नकल कराने को लेकर हरियाणा चर्चा में आ गया। रोहतक के कई लोगों ने मिल कर वायुसेना की परीक्षा को प्रभावित किया। अब जैसे ही देश के किसी राज्य में नकल का गिरोह पकड़ा जाता है तो शक की सुई पहले हरियाणा की तरफ मुड़ती है। पंजाब से सटा होने के चलते हरियाणे के युवा भी नशे की लत के शिकार होते जा रहे हैं, बीड़ी-सिगरेट जैसी चीजें उन्हें भी आकर्षित करने लगी हैं। आॅनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध के लिए बदनाम हरियाणा की तस्वीर को साक्षी मलिक और दंगल-सुल्तान जैसी फिल्मों ने बदलने की कोशिश जरूर की पर वास्तव में आज भी ग्रामीण इलाकों में लड़की का अपनी पंसद के लड़के से शादी कर लेना बेहद जोखिम भरा साबित होता है। राम रहीम और रामपाल जैसे बाबाओं की वजह से हरियाणा को बाबाओं वाला राज्य भी कहा जाने लगा है।

पिछले दिनों हरियाणा के रेवाड़ी में बारहवीं की टॉपर छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। इसकी पीड़िता वही लड़की थी जिसे दसवीं कक्षा में टॉप करने पर प्रधानमंत्री ने खुद सम्मानित किया था। हरियाणा सरकार ने छात्रा के माता-पिता को दो लाख रुपए का चेक देकर शांत करने की कोशिश की, लेकिन पीड़िता की मा ने सरकार को चेक वापस करते हुए कहा कि चेक की बजाय उसे इंसाफ मिलना चाहिए। ऐसी नाजुक घड़ी में सरकार का परिवार को दो लाख रुपए का चेक देने का क्या मतलब था! कहीं वह दो लाख रुपए देकर परिवार पर दबाव तो नहीं बनाना चाहती थी? हरियाणा वह राज्य है जिसने देश को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा दिया था। बेटियों की इज्जत को लेकर उसने सबसे पहले आवाज बुलंद की थी लेकिन आज देश के सामने उदाहरण बनने की बजाय जिस तरह हरियाणा की छवि धूमिल हो रही है, वह शोचनीय है।
’रोहित यादव, रोहतक, हरियाणा

बीमार सोच
हम ‘डिजिटल इंडिया’ में रहते हैं जहां सबको अपना जीवन साथी चुनने का हक कानूनी तौर पर दिया गया है। मगर तेलंगाना में ‘आॅनर किलिंग’ का जो मामला सामने आया है उससे लगता है कि कथित सवर्ण समाज की अनुसूचित जाति के लोगों के प्रति जो सोच बनी हुई है वह अभी भी बरकरार है। यह पहला मामला नहीं है जिसमें अपनी पसंद से शादी करने पर विवाहित जोड़े को परेशान किया या मौत के घाट उतार दिया जाता है। आॅनर किलिंग के ज्यादातर मामले जाति से जुड़े होते हैं और परिजन तथाकथित ‘इज्जत’ के लिए हत्यारे तक बन जाते हैं।

आखिर हम कैसा समाज बना रहे हैं जहां एक रूढ़िवादी और बीमार सोच के लोग किसी विवाहित जोड़े को चैन से जीने नहीं देते! संवैधानिक अधिकारों के तहत हर बालिग को अपनी पसंद के साथी की शादी करने का अधिकार बेशक मिला हो लेकिन जिस समाज में यह अधिकार मिला हुआ है वही अगर अपराधी है तो इस बीमारी से आखिर पीछा कैसे छुड़ाया जाए? सरकार को ‘आॅनर किलिंग’ के खिलाफ कड़ा कानून बनाना चाहिए ताकि अपनी पसंद से शादी करने वाला हर जोड़ा खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
’शगुफ्ता ऐजाज, दिल्ली

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