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चौपाल: सुरक्षा का तकाजा

सीएएटीएसए कानून में प्रावधान है कि जो देश अमेरिका के दुश्मनों, मसलन रूस, ईरान और उत्तर कोरिया इन तीनों देशों में से किसी से हथियार, तेल या कुछ भी खरीदेगा तो उसे अमेरिका दंडित करेगा!

Author October 9, 2018 6:06 AM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटोः रॉयटर्स)

संपादकीय ‘ताकत का करार’ (6 अक्तूबर) अमेरिका के सामंती चरित्र को बेपर्दा करता है। आज इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में ज्ञान-विज्ञान, स्वतंत्र चिंतन, आधुनिक जीवन शैली, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आदि के नए आलोक में जीना दुनिया के सभी देशों के लोगों के लिए एक सामान्य-सी बात है। ऐसे आधुनिक समय में कोई देश यह कहे कि मेरा मित्र तुम्हारा मित्र, मेरा शत्रु तुम्हारा शत्रु, मैं जिससे कहूं उससे अपनी जरूरत के सामान खरीदो, जिसे ना कहूं उससे मत खरीदो- जैसे निर्देश सुनकर हर प्रबुद्ध व्यक्ति यही कहेगा कि यह सोच सामंती युग की है। इस सामंती सोच को तो दो शताब्दी पूर्व ही दफनाया जा चुका है।

अत्यंत दुख की बात है कि आज भी कथित महाबली अमेरिका उसी सामंती युग में जी रहा है। उसने अपनी संसद में एक हास्यास्पद कानून ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट’ (सीएएटीएसए) बनाया है। इस कानून में प्रावधान है कि जो देश अमेरिका के दुश्मनों, मसलन रूस, ईरान और उत्तर कोरिया इन तीनों देशों में से किसी से हथियार, तेल या कुछ भी खरीदेगा तो उसे अमेरिका दंडित करेगा! गजब तर्क है! भारत जैसा स्वाभिमानी देश पिछली शताब्दी के मध्य में ही ब्रिटिश साम्राज्यवाद की गुलामी के जुए को फेंक चुका है। क्या हम अमेरिकियों के गुलाम हैं जो उसके इस कानून को मानें?

दरअसल, भारत को अपने दुश्मनों से निबटने के लिए आधुनिकतम हथियार रखने, खरीदने का पूरा अधिकार है। हमें पेट्रोलियम पदार्थ किससे खरीदना है यह भी हम विश्व बाजार के हिसाब से तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। क्या ईरान से तेल न खरीदने की नसीहत देने वाला अमेरिका हमें ईरान की दर पर तेल उपलब्ध कराएगा? पड़ोसी चीन और पाकिस्तान भारत द्वारा किए जाने वाले शांति, सदाशयता और शालीनता के व्यवहार के बावजूद बार-बार आंख दिखाते रहते हैं। क्या अमेरिका इन्हें इनके कुकृत्यों से आज तक रोक पाया है? फिर उसने किस आधार पर हमें रूस से रक्षात्मक एंटी मिसाइल शस्त्र एस-400 खरीदने से रोकने की कोशिश (कथित आदेश के जरिए) की? भारतीय राष्ट्र-राज्य के अति विश्वसनीय और संकट में सदा साथ देने वाले घनिष्ठ मित्र रूस से समझौते के तहत एंटी मिसाइल अस्त्र एस-400 खरीद को देश की स्वाभिमानी जनता का भरपूर समर्थन है। दुश्मनों को समय पर मुंहतोड़ जवाब देने और मुल्क की सुरक्षा, आत्मसम्मान और स्वाभिमान की रक्षा की खातिर किया गया यह करार हर लिहाज से स्वागतयोग्य है।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

खतरे में वन्यजीव
विश्व में एशियाई शेरों के एकमात्र गिर अभयारण्य में तेईस शेरों की मौत हो गई। इन मौतों का कारण ‘कैनाइन वायरस’ और ‘प्रोटोजोआ’ संक्रमण बताया गया है। यह गिर के शेरों के लिए एक बड़ा खतरा है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गुजरात सरकार और केंद्र से जवाब मांगा है। 1412 वर्ग किलोमीटर में फैले गिर अभयारण्य में केवल 523 शेर हैं। इनके विस्थापन के लिए मध्यप्रदेश के पालपुर कुनो वन्यजीव अभयारण्य को तैयार किया गया है लेकिन गुजरात सरकार ने इसे अपनी अस्मिता तथा गर्व से जोड़कर शेरों को विस्थापित करने से मना कर दिया है। अगर शेर ही नहीं रहेंगे तो अस्मिता कैसी! आज विश्व भर में वन्यजीव विलुप्त होने के कगार पर हैं। यह जैव विविधता के लिए गंभीर खतरे की घंटी है। इसके मद्देनजर वन्यजीव संरक्षण के काम में समन्वय स्थापित करने के लिए सभी जिम्मेदार निकायों को आगे आना चाहिए।
’अभिनव कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय

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