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चौपाल: किसका विकास

सीवर में सफाई करने वालों पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता जबकि वे हमारे समाज का अत्यंत महत्त्वपूर्ण काम करते हैं। लेकिन उनके श्रम की, उनकी जान की कोई कीमत ही नहीं!

Author October 30, 2018 5:44 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।(Express Photo by Manoj Kumar)

देश के विभिन्न भागों से सीवर की सफाई करते समय सफाईकर्मियों की मौत की खबरें अक्सर आती रहती हैं। कैसी विडंबना है कि हम चांद पर पहुंचने की बात करते हैं, नकदी रहित भारत आदि की बात करते हैं और इस तरह की खबरें भी आती रहती हैं। फिर भी हम दंभ भरते हैं कि प्रगति कर रहे हैं, हमारे यहां लोगों का जीवन स्तर सुधर रहा है, हमारी तमाम सरकारी नीतियां भी इसमें अपना योगदान कर रही हैं! मगर क्यों कोई एक वर्ग इस ‘विकास’ से अछूता है? फिर बात यह आती है कि विकास किसका? सीवर में सफाई करने वालों पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता जबकि वे हमारे समाज का अत्यंत महत्त्वपूर्ण काम करते हैं। लेकिन उनके श्रम की, उनकी जान की कोई कीमत ही नहीं! देश में नेता-अभिनेता की हर खबर को इलेक्टॉनिक मीडिया दिन भर कई-कई बार दिखाता है।

चुनावी दौर में यदि मुख्यमंत्री किसी आदिवासी या गरीब के घर खाना खाते हैं तो उसकी फोटो अखबारों में आती है मगर इस तरह के कामों में लगे व्यक्ति की जान जाने पर कहीं कोई मलाल नहीं। लगता है, हमारी सरकार बहरी हो गई है। जब तक कोई समुदाय अपने हक के लिए लड़ाई न लड़े, धरना-प्रदर्शन न करे तब तक उनका कुछ नहीं होता। और यह तो मजदूर और असंगठित वर्ग है। इनकी तो जद्दोजहद हर दिन सुबह उठते ही शुरू हो जाती है। तो इस स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए सुविधाएं मुहैया कराए। हमारा संविधान भी यही कहता है।

’प्रेरणा, भोपाल

जानलेवा लापरवाही
अमृतसर में दशहरे पर रावण दहन के समय जो हादसा हुआ उसमें हर पक्ष की गलती है चाहे वह प्रशासन हो, सरकार हो या फिर लोग हों। अपनी सुरक्षा अपने हाथों में होती है। लोगों ने लापरवाही बरती। जब उन्हें पता था कि रेल की पटरी पर खड़े हैं और जाहिर तौर पर वहां से ट्रेन गुजरेगी तो अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए था। लेकिन रावण दहन देखने में मग्न होने के कारण साठ से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी। प्रशासन या सरकार की गलती यह रही कि जब उस जगह पर दशहरा आयोजन की अनुमति नहीं थी तो फिर वहां रावण दहन का आयोजन कैसे किया गया? मतलब साफ है कि आयोजकों और प्रशासन की सांठगांठ रही। इस हादसे में पुलिस की भी जवाबदेही तय करने की जरूरत है और सबसे महत्त्वपूर्ण इससे सबक लेने की ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
’अदिति अग्निहोत्री, दिल्ली विश्वविद्यालय

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