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चौपाल: कानून के विरुद्ध

विवेक तिवारी की हत्या हुई घोर निंदनीय है मगर उससे भी बड़ा अपराध है हत्या के आरोपी सिपाही के समर्थन में अन्य पुलिस वालों का आना।

Author October 9, 2018 6:06 AM
आरोपी कॉन्सटेबल प्रशांत चौधरी (लाल टी-शर्ट में)(express photo)

किसी भी प्रदेश की पुलिस वहां पर कानून-व्यवस्था कायम रखने में सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान करती है लेकिन पिछले दिनों लखनऊ में पुलिस के सिपाही ने विवेक तिवारी नामक व्यक्ति की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी कि उसने सिपाही के कहने पर अपनी कार नहीं रोकी थी। हद तो तब हो गई जब आरोपी सिपाही को गिरफ्तार किए जाने पर पुलिस वालों का ही एक समूह इसके विरोध में उतर आया। उसने सोशल मीडिया से लेकर व्यक्तिगत स्तर तक आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी का विरोध किया और कुछ ने ड्यूटी से दौरान ही काली पट्टी बांध कर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई पर रोष व्यक्त किया।

विवेक तिवारी की हत्या हुई घोर निंदनीय है मगर उससे भी बड़ा अपराध है हत्या के आरोपी सिपाही के समर्थन में अन्य पुलिस वालों का आना। पुलिस का काम हर परिस्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखना और अपराध न होने देना है न कि सरकार द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई का विरोध करना। इस तरह की अनुशासनहीनता और कानून के विरुद्ध कार्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

’सुनील कुमार सिंह, मेरठ, उत्तर प्रदेश

नैतिक जिम्मेदारी
नवरात्र में अनेक लोग जगह-जगह सड़क किनारे भंडारे का आयोजन करते हैं। इस तरह के आयोजन के दौरान झूठी प्लेटें, दोने और प्लास्टिक के गिलास आदि सड़क पर फेंक देना क्या सही है? क्या इनका समुचित निबटान करने की नैतिक जिम्मेदारी ‘पुण्य कमाने की चाह’ रखने वाले आयोजनकर्ताओं की नहीं है? प्रसाद ग्रहण करने वालों का भी दायित्व बनता है कि वे झूठी पत्तलों को किसी निश्चित कूड़ेदान में डालें। किसी समय इन भंडारों में धातु या मिट्टी के बर्तनों या पत्ते की पत्तलों में भोजन परोसा जाता था, लेकिन आज की ‘फटाफट संस्कृति’ या ‘यूज ऐंड थ्रो संस्कृति’ के पोषक प्लास्टिक या थर्मोकोल के बर्तनों का उपयोग करने में शान समझते हैं।

प्लास्टिक के उत्पाद से भी खतरनाक थर्मोकोल के उत्पाद हैं। प्लास्टिक जहां धरती में समा कर 500 वर्षों में नष्ट होता है तो थर्मोकोल को नष्ट होने में 800 से 1000 वर्ष लगेंगे। अब भंडारों का आयोजन करने वाले फैसला करें कि वे एक वक्त का खाना खिला कर पुण्य कमाना पसंद करेंगे या प्लास्टिक और थर्मोकोल को फैलाकर सदियों तक पृथ्वी को गंदा करने में पाप के भागीदार बनेंगे!
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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