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चौपाल: मानव तस्करी का जाल

कई संस्थाएं और सुरक्षा जांच एजेंसियां भी मानव तस्करी पर निगाह रखती हैं। फिर भी मानव तस्करी पर रोक लगाने और आंकड़ों में कमी आने के बजाय उक्त रिपोर्ट तस्करी के भयावह रूप का खुलासा करती है।

Author January 14, 2019 6:39 AM
चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

आधुनिकता के इस दौर में मानव तस्करी की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। पाकिस्तान, भारत, अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश सहित तमाम एशियाई देशों से लड़कियों व बच्चों की तस्करी कर पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में बेचा-खरीदा जा रहा है। जांच एजेंसियों, सुरक्षा कानून व मानव तस्करी रोधी संस्थाओं के लाख कोशिशों के बाद भी मानव तस्करी पर नकेल कसना मुश्किल साबित होता जा रहा है। कमोबेश सभी देश अपनी सीमाओं के भीतर तस्करी रोकने के लिए कड़े कानून बनाए हैं। कई संस्थाएं और सुरक्षा जांच एजेंसियां भी मानव तस्करी पर निगाह रखती हैं। फिर भी मानव तस्करी पर रोक लगाने और आंकड़ों में कमी आने के बजाय उक्त रिपोर्ट तस्करी के भयावह रूप का खुलासा करती है। लिहाजा, पीड़ित देशों की सरकार मानव तस्करी रोधी संस्थाएं और सुरक्षा जांच एजेंसियों की अपनी-अपनी परंपरागत कार्यप्रणाली से इतिश्री करना होगा। नई तकनीक और साधन संपन्न देशों की मदद से मानव तस्करी पर शिकंजा कसने की जरूरत ही समय की मांग है। इससे की मानव तस्करी के कारोबार की जड़े खोदी जा सके। साथ ही भविष्य में कोई भी परिवार अपने बच्चों को खो ना सके और उनकी सुरक्षा की उम्मीदें बनी रहे।
’पवन कुमार मौर्य, नई दिल्ली

मुसीबत का मांझा
मकर संक्रांति उत्साह और खुशी का पर्व है। इस अवसर पर पतंग महोत्सव मनाया जाता है। लोग कई दिन पूर्व ही पतंग उड़ाने लग जाते हैं। वे दूसरों की पतंग काटने के लिए तेज धार वाला मांझा काम में लेते हैं। इसके चलते कई दुपहिया वाहन चालक मांझे में उलझ कर घायल हो जाते हैं। दुपहिया वाहन से सड़क पर निकलने वालों के लिए डोर व मांझा जान लेवा बन गया है। अब तक कई लोग मांझे के के शिकार हो चुके हैं। पतंगबाजी के शौकीनों को चाहिए कि तेज मांझे का उपयोग नहीं करें, सादा डोर काम में लें। सड़क पर खड़े होकर पतंग न उड़ाएं। डोर व मांझा फैला हुआ न छोड़ें। पतंग कटने के बाद मांझा-डोर पेड़ से लटकते रहते हैं। इनके जाल में आकर अक्सर पक्षी घायल हो जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। मोटर साइकिल चलाने वाले लोगों के गले में मांझा फंस जाता है और गला काट देता है। कई बार तो ऐसे हादसों में जान तक चली जाती है।

मांझे से लोगों के साथ-साथ पक्षियों की मौत होना भी चिंताजनक है। लोगों को ज्यादा लंबी पतंग उड़ाने से बचना चाहिए। दुपहिया वाहन चालकों को चाहिए कि अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रह कर वाहन चलाएं। पतंगबाजी के दिनों में वाहन की गति धीमी रखें ताकि अचानक से मांझा आने पर गाड़ी रोक कर बचा जा सके। वाहन चलाते समय हेलमेट अवश्य पहन कर रखें और उसका शीशा बंद करके रखें। गले में मफलर या स्कार्फ पहन कर रखें ताकि मांझा आ भी जाए तो नुकसान कम हो। मांझे के इस खतरे से बचने के लिए लोगों में जागरूक पैदा करनी होगी।
’राजेंद्र कुमार कुमावत, जयपुर

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