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चौपाल: ठोस विकल्प के लिए

...जैसा कि मौजूदा वक्त में देश की राजनीति में दिखाई दे रहा है, जहां एनडीए और यूपीए गठबंधन के अलावा तीसरा महागठबंधन भी खुद को जनता का प्रतिनिधि बनने को तैयारी में है।

Author January 7, 2019 6:13 AM
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव।

एक बहुत अच्छी कहावत है कि नेता हमेशा अगला चुनाव के बारे में सोचता है, मगर एक देशभक्तराजनेता हमेशा अगली पीढ़ी के बारे में सोचता है। दरअसल यह कहावत आने वाले वक्त में देश की जरूरत बनने वाली है। विपक्षी दलों को चुनावी साल का इंतजार रहता है। देश की राजनीति धीरे-धीरे खुद को आम चुनाव के लिए तैयार करने में जुट गई हैं। दरअसल चुनाव हमेशा विकल्प का खेल होता है जिसमें जिस राजनीतिक पार्टी का ज्यादा बेहतर विकल्प जनता को बेहतर लगता है जनता भी उसी को चुनाव में जिताती है। मगर कभी-कभी ज्यादा विकल्प जनता के लिए मुसीबत का सबब बन जाते हैं।

जैसा कि मौजूदा वक्त में देश की राजनीति में दिखाई दे रहा है, जहां एनडीए और यूपीए गठबंधन के अलावा तीसरा महागठबंधन भी खुद को जनता का प्रतिनिधि बनने को तैयारी में है। इस तीसरे खेमे का प्रतिनिधित्व करने का काम दूसरी बार तेलंगाना से जीतने वाले मुख्यमंत्री केसीआर कर रहे हैं। ऐसे में तो लग रहा है कि मौजूदा राजनीति सन 1996-98 में पहुंचने वाली है जब जनता ने क्षेत्रीय पार्टियों के गठबंधन वाली सरकार को देश चलाने का मौका दिया था। आजादी के बाद से लेकर अभी तक हमारे देश की राजनीति का इतिहास रहा है कि कभी भी क्षेत्रीय दलों के महागठबंधन की बनी सरकार ज्यादा दिनों तक दिल्ली की गद्दी पर काबिज नहीं हो पाई। मौजूदा राजनीति में तीसरा मोर्चा कितना सफल हो पाएगा, यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा, मगर सबसे ज्यादा जरूरी है कि विपक्ष अपने एजेंडे को जनता के सामने रखे ताकि जनता को लगे कि विपक्षी दल सिर्फ मौजूदा सरकार को हटाने का नहीं, बल्कि देश के भविष्य को लेकर भी सोच रही है।
’पीयूष कुमार, नई दिल्ली

भारत के लिए खतरा
जब से अमेरिका ने पाकिस्तान से दूरी बनाई है तब से इस्लामाबाद और बेजिंग की दूरियां कम हो रही हैं। इस साल के पहले ही दिन चीनी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चीन अपने दोस्त पाकिस्तान के लिए अति उन्नत युद्धपोत का निर्माण कर रहा है, इससे भारत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हिंद महासागर में शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच एक बड़ा द्विपक्षीय हथियार समझौता हुआ था और पाकिस्तान ने इस तरह के चार अत्याधुनिक युद्धपोत चीन से खरीदने की घोषणा की थी। मौजूदा पोत इन्हीं में से एक है। चीन पाकिस्तान को हथियारों की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है। असल में अमेरिका ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की जमीन पर जब तक आतंकियों को पनाह मिलती रहेगी तब तक उसे आर्थिक सहायता नहीं दी जाएगी। इसके बाद पाकिस्तान और चीन की नजदीकियां लगातार बढ़ रही हैं। पाकिस्तान रूस, चीन और इटली से बड़े टैंक और तोप खरीदने की तैयारी में है। वास्तव में चीन ने पाकिस्तान से अमेरिका की दूरी को अपने लिए एक बेहतर अवसर के रूप में लिया है और इसके लिए वह पाकिस्तान की हर तरह से मदद के लिए तैयार है। लेकिन इसका खामियाजा केवल पाकिस्तान को ही नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र को उठाना होगा। बेहतर हो कि वह हथियार खरीदने के बजाय अमन और शांति की राह पर आगे बढ़े।
’अमन सिंह, बरेली

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