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चौपाल: जमीनी राजनीति

भाजपा के साथ एक कर्मठ और समर्पित संगठन संघ परिवार जुड़ा है जो उसकी चुनावी जीत में बड़ी भूमिका निभाता है। कांग्रेस के पास भी एक अच्छा संगठन कांग्रेस सेवादल था जो मरणासन्न है।

Author Updated: March 28, 2018 4:46 AM
पीएम नरेंद्र मोदी।(फाइल फोटो)

इक्का-दुक्का चुनावी नतीजे अपने पक्ष में आने से कांग्रेस इस गलतफहमी की शिकार है कि मौजूदा केंद्र सरकार से निराश लोग अपने आप उसकी झोली में वोट डाल देंगे। क्या कांग्रेस नहीं जानती कि जिस भाजपा से उसकी टक्कर है उसने उसे राजनीतिक परिदृश्य से मिटा देने अर्थात ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया है और वह बड़ी तेजी से इस नारे को हकीकत में तब्दील करने में जुटी है। भाजपा के साथ एक कर्मठ और समर्पित संगठन संघ परिवार जुड़ा है जो उसकी चुनावी जीत में बड़ी भूमिका निभाता है। कांग्रेस के पास भी एक अच्छा संगठन कांग्रेस सेवादल था जो मरणासन्न है। हर राजनीतिक पार्टी को यह समझ लेना चाहिए कि जो जमीनी स्तर पर लोगों के दरम्यान काम करेगा कामयाबी उसे ही मिलेगी। ड्राइंग रूम में राजनीति करने का समय अब गुजर चुका है।
’आसिफ खान, गली नंबर 2, बाबरपुर, दिल्ली

बच्चों के लिए
कैलाश सत्यार्थी ने देश में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक ‘राष्ट्रीय बाल पंचाट’ बनाने की सिफारिश की है। सत्यार्थी की बच्चों के प्रति संवेदनशीलता अत्यंत ग्रहणीय है पर बच्चों के हितों के लिए पंचाट बनाना एक लक्ष्य की व्यापकता को सीमित करने जैसा है। बच्चा राष्ट्र की निधि और देश के भविष्य का निर्माता है। साथ ही वह हमारे समाज का आईना है जिसमें समाज की मान्यताएं और प्रविधियां परिलक्षित होती हैं। बच्चों की परवरिश और संस्कार के लिए समाज में परिवार नामक इकाई की स्थापना की गई। इसलिए बच्चे के समुचित विकास और मानवोचित संस्कार की महती जिम्मेदारी पूरे परिवार के कंधों पर होती है। परिवार में बच्चे की सतर्क देखरेख ही समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए किसी न्यायाधिकरण की अपेक्षा समाज व प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता अनिवार्य है। इसके अलावा अभावग्रस्त, बेघर और अनाथ बच्चों के लिए समाज के सभी लोगों में संवेदनशीलता और सजग जिम्मेदारी का भाव भी बहुत आवश्यक है ताकि देश की नन्हीं पौध को विकसित होने के लिए एक स्वस्थ वातावरण मिल सके। बच्चों के लिए इस वातावरण का निर्माण किसी कानून द्वारा नहीं किया जा सकता बल्कि लोगों की निस्वार्थ भावना और अगली पीढ़ी के लिए एक जागरूक बेचैनी से ही किया जा सकता है।
’सुमन, प्लेटिनम एनक्लेव, रोहिणी, दिल्ली

रेलवे की उपलब्धि
भारतीय रेलवे ने हाल ही में दो उल्लेखनीय सफलताएं हासिल कर दिखार्इं लेकिन उनका जिक्र मीडिया में कुछ खास नहीं हुआ। विश्व में पहली बार प्रदूषण-मुक्ति के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारतीय रेल ने एक 2600 हॉर्सपॉवर के डीजल इंजन को 5000 हॉर्स पॉवर के इलेक्ट्रिक इंजन में बदल कर इतिहास रचा। दूसरी ओर मधेपुरा, बिहार के अपने कारखाने में रेलवे ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के अंतर्गत यूरोपीय कंपनी एल्सटोम के साथ मिल कर 12,000 हॉर्सपॉवर का सुपरशक्ति इंजन बनाया, जो छह हजार टन माल-ढुलाई की क्षमता रखता है। अपना मीडिया फिल्म कलाकार श्रीदेवी के निधन की खबर देने में ऐसा लगा था कि वास्तविक राष्ट्रीय गौरव की अनुभूति कराने वाली उपरोक्त खबरें उसे महत्त्वहीन लगीं। गजब है!
’अजय मित्तल, मेरठ

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