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चौपालः ‘नाम का परदा’ और ‘घातक प्लास्टिक’

प्लास्टिक के इस्तेमाल से मानव और जानवर के जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। साथ ही अधिक मात्रा में पर्यावरण प्रदूषित होता है।

Author June 7, 2018 05:03 am
प्लास्टिक के इस्तेमाल से मानव और जानवर के जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। साथ ही अधिक मात्रा में पर्यावरण प्रदूषित होता है।

नाम का परदा

शेक्सपियर ने कहा था कि ‘नाम में क्या रखा है’! मगर वक्त के साथ कुछ बातों का जिक्र और उनकी वजहें पुरानी हो जाती हैं। इसलिए शायद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुगलसराय जंक्शन का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रख दिया। यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा की सरकार ने अपने राष्ट्रवाद को सबसे ऊंचा दिखाने के लिए ऐसा किया हो। पहले भी गुड़गांव को गुरुग्राम में बदल दिया गया, औरंगजेब रोड को डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम रोड और डलहौजी रोड को दारा शिकोह रोड का नाम दिया गया।

क्या इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए पुराने दस्तावेजों के इतिहास को मिटाना जरूरी है? क्या किसी सड़क या जगह के नाम को बदल देने से उस जगह से जुड़ी तमाम यादें या पुराने इतिहास मिट जाएंगे? क्या बीते कल को और इतिहास में दर्ज घटनाओं को बदला जा सकता है? एक सवाल यहां और उभरता है कि भाजपा की सरकार जहां हुकूमत कर रही है, वहीं नए नामकरण क्यों हो रहे हैं? इसमें ज्यादातर उन नामों के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा है जो कहीं न कहीं मुसलिम समुदाय से ताल्लुक रखता है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हो सकता है नए नाम की सूची में अगला नाम फैजाबाद या जौनपुर, इलाहाबाद या फिर अहमदाबाद का हो। मगर जरूरत इसकी है कि जगहों का नाम नहीं, वहां की बुरी हालत को बदला जाए।

प्रिंस कुमार, नई दिल्ली

घातक प्लास्टिक

प्लास्टिक के इस्तेमाल से मानव और जानवर के जीवन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। साथ ही अधिक मात्रा में पर्यावरण प्रदूषित होता है। ऐसे में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाना अनिवार्य हो गया है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने प्लास्टिक रोकने के लिए कड़े कानून का प्रावधान किया हुआ है। दूसरी ओर, विश्व में प्रत्येक मिनट में लाखों की संख्या में प्लास्टिक की बोतलें खरीदी जाती हैं। भारत में भी सर्वाधिक बोतल वाली प्लास्टिक का प्रयोग किया जाता है। बिना यह जाने-समझे कि इसका प्रभाव पर्यावरण और मानव सेहत पर कितना घातक पड़ रहा है।

अगर इसका समाधान खोजना है तो सबसे पहले दुकानदारों को प्लास्टिक बैग में सामान देना बंद करना पड़ेगा। सभी उपभोक्ताओं को भी खरीदारी के लिए अपने साथ एक कपड़े का थैला ले जाने की आदत डालनी होगी। इससे भारी मात्रा में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगेगी। झारखंड और हिमाचल प्रदेश में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध हैं और हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी प्लास्टिक पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इसी तरह सभी राज्य सरकारों को प्लास्टिक के प्रयोग को प्रतिबंधित करना चाहिए, ताकि इसका इस्तेमाल कम हो सके।

कशिश वर्मा, एमसीयू, नोएडा

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