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चौपालः जलवायु परिवर्तन

विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट की मानें तो अगले तीन दशक में ही मानसूनी बारिश के वितरण में भारी बदलाव आने वाले हैं। इसका परिणाम यह होगा कि जहां आज भारी बारिश हो रही है वहां कुछ दशकों में सूखा पड़ेगा।

Author July 14, 2018 7:45 AM
जहां एक ओर हमारे देश के पूर्वी क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा हो रही है वहीं दूसरी ओर दक्षिण क्षेत्रों में सामान्य से 20 प्रतिशत ज्यादा बारिश देखने को मिल रही है।

जलवायु परिवर्तन

विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट की मानें तो अगले तीन दशक में ही मानसूनी बारिश के वितरण में भारी बदलाव आने वाले हैं। इसका परिणाम यह होगा कि जहां आज भारी बारिश हो रही है वहां कुछ दशकों में सूखा पड़ेगा। इस दुर्भाग्यपूर्ण और डराने वाले बदलाव का सबसे बड़ा कारण है जलवायु परिवर्तन। जहां एक ओर हमारे देश के पूर्वी क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा हो रही है वहीं दूसरी ओर दक्षिण क्षेत्रों में सामान्य से 20 प्रतिशत ज्यादा बारिश देखने को मिल रही है। मानसून के इस बदलते मिजाज के पीछे ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण का भी हाथ है।

हमारे देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर रहती है और किसान मानसून पर। अगर मानसून कमजोर पड़ता है तो यह न किसानों के लिए अच्छा होगा न देश की अर्थव्यवस्था के लिए। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन से बढ़ते तापमान और मानसून में आए बदलाव के कारण भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 2.8 प्रतिशत के खर्च का दबाव बढ़ सकता है और 2050 तक देश की आबादी के करीब आधे लोगों का जीवन स्तर प्रभावित हो सकता है। जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं के लिए हमारे देश से ज्यादा दूसरे बड़े विकसित देश जिम्मेदार हैं मगर इसके घातक परिणाम हमारे देश पर भी पड़ने वाले हैं।

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इसलिए वक्त आ गया कि हमारी सरकार जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या पर गंभीरता से विचार कर इसका समाधान जल्द से जल्द निकाल सके ताकि देश के अंदर भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखा न पड़े।

’पियुष कुमार, नई दिल्ली

खींचतान पर विराम

जब से दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है तभी से मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान का दौर जारी रहा है। इसके कारण दिल्ली की कई विकास परियोजनाएं लटकी हुई थीं। कभी अफसरशाही को लेकर तो कभी अन्य मामलों को लेकर, उपराज्यपाल हमेशा खुद को सर्वोच्च समझते थे। इसके जवाब में विपक्षी पार्टी भी केजरीवाल पर काम न करने के आरोप लगाती थी। इससे सरकार को चारों तरफ से निंदा का दंश झेलना पड़ता था।

इसी को देखते हुए कभी-कभी बात इतनी बढ़ जाती थी कि उपराज्यपाल मुख्यमंत्री को मिलने तक का समय नहीं देते थे। आखिर में लड़ाई बढ़ते-बढ़ते अदालत तक पहुंच गई। वैसे तो अदालत के फैसले से पहले ही सभी जानते थे कि न तो मुख्यमंत्री सर्वोच्च होता है और न ही उपराज्यपाल। सर्वोच्च तो सिर्फ भारतीय संविधान है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने साबित कर दिया है कि संविधान व जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार ही सर्वोच्च है और उसे उपराज्यपाल सिर्फ सलाह दे सकता है, किसी बिल या कानून को रोक नहीं सकता।

इस फैसले को केजरीवाल अपनी जीत बता रहे हैं मगर यह न तो केजरीवाल की जीत है और न ही दिल्ली की जनता की, बल्कि यह जीत भारतीय संविधान को समर्पित है। आज कोई केंद्र या राज्य सरकार कितना भी जोर लगा ले मगर जब बात संविधान की आती है तो सत्यमेव जयते ही होता है।

’मौहम्मद अली, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म

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