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चौपालः चुनाव के चरण

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के लिए रिकॉर्ड 92 करोड़ से अधिक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

Author April 5, 2019 2:16 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के लिए रिकॉर्ड 92 करोड़ से अधिक नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भारतीय इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा व लंबे समय तक चलने वाला आम चुनाव साबित होने जा रहा है। जाहिर है, अगर इतनी बड़ी संख्या में मतदाता होंगे तो इसे समुचित व व्यवस्थित प्रकार से संचालित करने के लिए अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता होगी और समय भी अधिक ही लगेगा। इसीलिए इसे अनेक चरणों में इसे कराना आवश्यक हो जाता है। इस लंबी चुनाव प्रक्रिया से आमजन को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। देश या प्रदेश में सभी नए विकास कार्य और योजनाएं लगभग तीन माह के लिए लंबित हो जाते हैं। अनेक सरकारी कर्मचारियों के चुनाव ड्यूटी पर होने के कारण विभिन्न विभागों में जनसंपर्क कार्यों पर भी असर पड़ना लाजिमी है। लेकिन इस सबके बावजूद सुरक्षित व साफ-सुथरे चुनाव करना भी तो प्राथमिकता में आता है।

याद कीजिए, दो दशक या इससे पहले जब एक ही चरण में मतदान होता था तब मत पेटियां लूटने या बूथ पर कब्जे की कितनी घटनाएं होती थीं! अनेक मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को दहशत के बूते इकतरफा मतदान करने के लिए बाध्य किया जाता था। विभिन्न समुदायों, गुटों और दलों के समर्थकों के बीच हिंसा-प्रतिहिंसा का तांडव आम था।

मतदाताओं को शराब, उपहार या रुपयों का प्रलोभन देकर अपने हक में वोट डालने के लिए बाध्य किया जाता था। अनेक चरणों में चुनाव कराने का सबसे बड़ा लाभ उन संवेदनशील प्रदेशों और इलाकों को हुआ है जहां लोगों के मन में मतदान करने की हिम्मत तक नहीं होती थी और वे मतदान केंद्रों तक पहुंच ही नहीं पाते थे। विभिन्न चरणों में मतदान करने से अवश्य ही चुनाव प्रकिया लंबी हुई है, लेकिन यह आज की परम आवश्यकता है और एक स्वस्थ लोकतांत्रिक राष्ट्र के हित में भी है।
’सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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