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चौपालः घुसपैठ पर लगाम और समता का तकाजा

एक अनुमान के अनुसार इस समय देश में अवैध घुसपैठियों की संख्या दो करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। प्रतिवर्ष इस संख्या में इजाफा हो रहा है। असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का कार्य लगातार अद्यतन किया जा रहा है।

Author Published on: October 9, 2019 1:36 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

इन दिनों केंद्र और राज्य सरकारें अपने विभिन्न विभागों में काम करने के लिए विभिन्न शासकीय पदों पर संविदा या दैनिक वेतन भोगी के रूप में अनुबंधित कर्मचारियों की भर्ती करती हैं। ये पद अस्थायी होते हैं जो एक निश्चित समय तक के लिए बनाए जाते हैं। उसके बाद सरकार या तो इन कर्मचारियों को हटा देती है या प्रतिवर्ष इनके करार को बढ़ाती रहती है। ऐसे कर्मचारियों को सरकार की तरफ से इन्य कर्मचारियों जैसी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जातीं। इनके वेतन भी स्थायी कर्मचारियों की तुलना में काफी कम रहते हैं। विभागों में कार्य करने वाले नियमित कर्मचारी भी इनसे अत्यधिक काम लेते हैं और ये भविष्य में नियमित होने के लोभ में आकर निरंतर बेहतर कार्य करते रहते हैं।

इन पदों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की मानसिकता यह रहती है कि हमारे बेहतर काम और अधिकारियों की प्रशंसा से हम एक दिन नियमित हो जाएंगे। ऐसी अस्थायी और अनुबंधित भर्तियों से कर्मचारियों का सिर्फ शोषण होता है। शासन द्वारा कम वेतन देना, सुविधाओं से वचित रखना, नौकरी में अस्थिरता रहना इनके लिए सबसे बड़ी समस्या बना रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत पर मुहर लगाते हुए कहा है कि अस्थायी कर्मचारी भी स्थायी की तरह मेहनताना पाने के हकदार हैं। फिर भी सरकार इस सिलसिले में न तो कोई कदम उठा रही है और न किसी प्रकार की दिलचस्पी दिखा रही है। लिहाजा, वर्तमान की जरूरत है कि पदों पर स्थायी भर्ती की जाए। अगर अनुबंध के तौर पर काम कराया जा रहा है तो उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह वेतन और सुविधाएं भी दी जाएं। इससे न सिर्फ वे आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि सरकारी विभागोें में काम करने के लिए लोगों को एक अनुकूल माहौल भी मिलेगा ।
’अमित पांडेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

फिर चर्चा के केंद्र में है राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का मुद्दा 
लोकसभा में गृहमंत्री के वक्तव्य और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के बाद राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में है। दरअसल, देश में अवैध घुसपैठियों का प्रवेश आजादी के बाद से एक गंभीर समस्या रहा है। खासतौर पर बांग्लादेश सीमा से सटे राज्य इस विभीषिका को ज्यादा झेल रहे हैं। राजधानी दिल्ली में भी घुसपैठियों ने अपना डेरा जमा रखा है। पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मेघालय, ओडीशा, छत्तीसगढ़ आदि राज्य इस समस्या का सामना कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार इस समय देश में अवैध घुसपैठियों की संख्या दो करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। प्रतिवर्ष इस संख्या में इजाफा हो रहा है। असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का कार्य लगातार अद्यतन किया जा रहा है।

संविधान के अनुच्छेद पांच से ग्यारह के प्रावधानों और नागरिकता कानून 1955 के अनुसार देश की नागरिकता से संबंधित प्रावधान सख्ती से लागू हों। अफसोस की बात है कि कई विपक्षी दल वोट बैंक की राजनीति से जोड़ कर इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वैसे पहले ही बड़ी आबादी वाले देश के लिए अवैध घुसपैठियों को झेलना भारी पड़ सकता है। अब जरूरत है कि आधार की तरह एक राष्ट्रीय नागरिक डिजिटल कार्ड बने। सीमाओं पर बाड़ लगाने का काम जल्द निपटाए ताकि अवैध घुसपैठियों पर पूर्ण रूप से रोक लग सके।
’बिजेंद्र कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय्

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