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चौपालः उद्योगों की सुध

एमएसएमई इकाइयां बड़े उद्योगों की पूरक हैं। यह क्षेत्र बड़े उद्योगों की सहायक इकाइयों के तौर पर काम करता है और देश के औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।

भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) के सर्वे के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार पैदा करने में आगे रहा। इसने तकरीबन बारह करोड़ लोगों को रोजगार दिया और भारत के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 45 फीसद है। लगभग बीस फीसद एमएसएमई इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई क्षेत्र) राष्ट्रीय आर्थिक ढांचे की रीढ़ हैं। इन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक मुश्किलों और चुनौतियों से निपटने की ताकत दी है। पिछले पांच दशकों में एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था का बेहद मजबूत और गतिशील क्षेत्र बन कर उभरा है। यह अपेक्षया कम लागत पर बड़ी संख्या में रोजगार पैदा कर और उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान करता है। रोजगार पैदा करने के मामले में कृषि के बाद इसी क्षेत्र का स्थान है।

एमएसएमई इकाइयां बड़े उद्योगों की पूरक हैं। यह क्षेत्र बड़े उद्योगों की सहायक इकाइयों के तौर पर काम करता है और देश के औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। एमएसएमई, अर्थव्यवस्था के तमाम क्षेत्रों में योगदान कर अपना दायरा बढ़ा रहा है और घरेलू और वैश्विक बाजारों की जरूरतें पूरी करने के लिए विभिन्न तरह के उत्पाद और सेवाएं तैयार कर रहा है। पूरी अर्थव्यवस्था के संदर्भ में मजबूत एमएसएमई क्षेत्र के महत्त्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य इस प्रकार हैं- समूची अर्थव्यवस्था के कुल मूल्य का तकरीबन एक तिहाई हिस्सा इससे जुड़ा है। देश का तकरीबन एक तिहाई विनिर्माण उत्पादन इस क्षेत्र के जरिए होता है। देश के सभी प्रतिष्ठानों में तीन चौथाई इस क्षेत्र के हैं। पूरे देश में एमएसएमई की 3.61 करोड़ इकाइयां हैं और उनका योगदान इस तरह है- विनिर्माण संबंधी जीडीपी में 6.11 प्रतिशत हिस्सेदारी, सेवा गतिविधियों से जुड़ी जीडीपी में 24.63 फीसद का योगदान और देश उत्पादन में 33.74 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) के सर्वे के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार पैदा करने में आगे रहा। इसने तकरीबन बारह करोड़ लोगों को रोजगार दिया और भारत के कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी करीब 45 फीसद है। लगभग बीस फीसद एमएसएमई इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। एमएसएमई क्षेत्र नोटबंदी और जीएसटी से अत्यधिक प्रभावित हुआ है। इस क्षेत्र को देश को पांच लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनाने में बड़ी भूमिका निभानी होगी। एमएसएमई को बढ़ावा देने लिए विशेष पहल की दरकार है जिनमें शामिल है: नकदी, कर्ज एवं बाजार की उपलब्धता, बेहतर तकनीक, कारोबार में सुगमता और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा आदि। इस क्षेत्र के डिजिटलीकरण से ऐसी उद्योग इकाइयां न सिर्फ अपने वैश्विक समकक्षों से प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं बल्कि मेक इन इंडिया अभियान में भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
’सूर्यभानु बांधे, रायपुर, छत्तीसगढ़

बोरवेल में बच्चे
आए दिन खुले बोरवेल में मासूम बच्चों के गिरने की खबरें पढ़ने-सुनने को मिलती हैं। इनमें से कुछ को तो घंटों संघर्ष के बाद बचा लिया जाता है, जबकि कुछ की मौत हो जाती है। हाल ही में तमिलनाडु में एक बच्चे के साथ इसी तरह के हादसे ने मन को दुखी कर दिया। यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। आखिर कब तक असावधानी और लापरवाही का खमियाजा मासूम बच्चोंं को भुगतना पड़ेगा। आंकड़ों के अनुसार बोरवेल, गड्ढों और मेनहोल में गिरने से हर वर्ष लोगों की मौतें होती हैं। जरूरत है ऐसी घटनाओं से सबक सीखने की। सूखे पड़े बोरवेल को या तो बंद कर दिया जाए या फिर उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएं। ऐसी घटनाओं के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
’साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर

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