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चौपालः सूचनाएं और उम्मीदें

स्विट्जरलैंड उन्हीं देशों को सूचनाएं उपलब्ध कराता है, जहां गोपनीयता के कानून परिपक्व हैं। भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारतीयों द्वारा जो धन स्विस बैंक में जमा किया गया है, उसके आधार पर भारत विश्व में चौहत्तरवें नंबर पर आता है।

Author Published on: October 12, 2019 12:59 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

स्विट्जरलैंड ने हाल में कालेधन की सूचना के स्वत: आदान-प्रदान की नई व्यवस्था के तहत भारत के साथ-साथ विश्व के पचहत्तर अन्य देशों को भी उनके नागरिकों के स्विस बैंक खातों की सूचना प्रदान की है। पहली बार भारत सरकार को स्विस बैंक में खाता रखने वाले अपने नागरिकों के बारे में इस तरह की सूचनाएं मिली हैं। स्विस सरकार ने पिछले साल भी इस तरह की सूचना छत्तीस देशों के साथ साझा की थी। यह जरूरी नहीं है की जो सूचनाएं भारत सरकार को स्विट्जरलैंड से मिली हैं, उसमें सभी अवैध खातों की जानकारी हो। उसमें कुछ खाताधारक ऐसे भी होंगे जो वैध तरीके से अपने व्यवसाय या अपनी शिक्षा के लिए स्विट्जरलैंड से जुड़ाव रखते होंगे।

भारत सरकार को अब द्वितीय चरण में उन खाताधारकों के भी बारे में जानकारी एकत्र करने का प्रयास करना होगा जिनके खाते अब बंद हो चुके हैं। 2018 की रिपोर्ट के अनुसार स्विस बैंक में भारतीयों का कुल जमा सात हजार करोड़ रुपया था। सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान एक औपचारिक प्रक्रिया है। इसलिए हमारे पास ज्यादा सूचनाएं आएंगी तो इससे निश्चित तौर पर कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी। पहले सिर्फ आपराधिक व्यक्तियों की सूचनाएं ही साझा होती थीं। इस माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को हम सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, लेकिन इनके आधार पर कार्रवाई जरूर हो सकती है।

सवाल यह है कि जो सूचनाएं हमें स्विस बैंक से मिली हैं, वे हमारे लिए कितनी उपयोगी हैं? क्योंकि किसी भी खाता धारक का नाम और उसका स्थायी पता किसी भी अन्य देश को नहीं सौंपा जाता है। इसके अतिरिक्त बैंक बैलेंस की जानकारी भी इस प्रकार के सूचनाओं के अंतर्गत नहीं दी जाती है। इसलिए यह हमारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती होगी। इस प्रकार की सूचनाएं एक विशेष कोडिंग प्रक्रिया के तहत उपलब्ध होती हैं, जो मात्र इशारा कर सकती हैं, और उस को अंजाम तक पहुंचाना जांच एजेंसियों का काम है।

स्विट्जरलैंड उन्हीं देशों को सूचनाएं उपलब्ध कराता है, जहां गोपनीयता के कानून परिपक्व हैं। भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारतीयों द्वारा जो धन स्विस बैंक में जमा किया गया है, उसके आधार पर भारत विश्व में चौहत्तरवें नंबर पर आता है। लेकिन आशंका यह भी जताई जा रही है कि हो सकता है विगत वर्षों में अवैध रूप से जमा रहे धन का प्रवाह किसी अन्य देश में हो गया हो। इसलिए जब तक कुछ साल पुरानी सूचनाएं भी न आ जाएं, कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।

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