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चौपालः भरोसे के तार

काश कि दंगाई भी इनसे सीख लेकर इनके संदेश को समझ पाती कि इंसानियत सभी धर्म से ऊपर है तो दिल्ली में एक बार फिर मानवता इस तरह शर्मशार होने से बच जाती।

Author Updated: February 29, 2020 1:51 AM
दिल्ली में हुई हिंसा की वजह से अबतक 42 लोगों की मौत हो चुकी है। Photo: PTI

पिछले कुछ दिनों तक जहां देश की राजधानी दिल्ली अमानवीय सांप्रदायिक दंगे में सुलगती रही, वहीं दोनों समुदाय के लोगों ने एक बार फिर भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति को सही साबित करते हुए सांप्रदायिकता की संकीर्ण हिंसक मानसिकता से बाहर निकल कर मानवता के उच्च आदर्शों की बेहतरीन मिसाल पेश की। एक तरफ हर ओर खौफ का मंजर था और लोग एक दूसरे का जान लेने को आमादा थे, दूसरी ओर कई मोहल्लों और दंगाग्रस्त इलाकों में दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे की ढाल बन कर सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के लिए जान की बाजी लगा कर एक दूसरे की रक्षा रहे थे।

काश कि दंगाई भी इनसे सीख लेकर इनके संदेश को समझ पाती कि इंसानियत सभी धर्म से ऊपर है तो दिल्ली में एक बार फिर मानवता इस तरह शर्मशार होने से बच जाती। इतिहास उन किरदारों को कभी नहीं भूलेगी जो खूनी मंजर से बाहर निकल कर भरोसे की नई इमारत तैयार कर रहे थे और इंसानियत की रक्षा के लिए उन्मादी भीड़ से मुकाबला कर रहे थे। हम इन चंद लोगों से बड़ी सीख लेने की जरूरत है।
’अंकित कुमार मिश्रा, समस्तीपुर, बिहार
बुजुर्गों की जगह
वर्तमान में कई वृद्ध परिजनों का तिरस्कार झेल रहे हैं। इसकी मुख्य वजह आधुनिकीकरण के बीच कामकाजी लोगों का स्थानांतरण और युवाओं का शहरों की ओर पलायन आदि से बुजुर्गों की अनदेखी हो रही है। साथ ही अपने बड़ों के प्रति आदर सम्मान छूटता जा रहा है। संग बैठ कर भोजन करना, कार्यक्रमों में और बाहर घूमने में अपने माता-पिता को साथ लेकर जाने की या उनके साथ जाने की सोच में बदलाव आने लगा है। वृद्ध माता-पिता स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से देखभाल के लिए उम्मीद करते हैं। उनके प्रति अनदेखी करेंगे तो हमारे बच्चे भी उसी का अनुसरण करेंगे। ऐसे में माता-पिता के मन में आ रहे युवाओं में इस तरह के बदलाव से भविष्य के चिंतनीय प्रश्न उठने लगे हैं। युवाओं को चाहिए कि माता-पिता के लिए इलेक्ट्रॉनिक युग की भाग-दौड़ भरी दुनिया में से माता-पिता के लिए कुछ समय निकाले। परिजनों को चाहिए कि वे वृद्ध लोगों की अनदेखी न करें, बल्कि उनका सम्मान करें।
’संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर

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