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चौपालः समय की मांग

न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि उनके मंत्री और अन्य नेता भी रोजगार की चर्चा से दूर भागते नजर आते हैं। विपक्ष द्वारा जब सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश की जाती है तब वह केंद्रीय भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) के आंकड़े दिखा कर मामले को शांत करने का प्रयास करती है।

Author Published on: January 29, 2020 2:50 AM
तालकटोरा स्टेडियम में परीक्षा पर चर्चा करते पीएम मोदी

बीती बीस जनवरी को प्रधानमंत्री ने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में परीक्षा पर चर्चा की। इस चर्चा में वे देश भर के छात्रों से रूबरू हुए। उन्होंने छात्रों के कई सवालों के जवाब दिए। साथ ही, आगामी परीक्षा के लिए उन्हें कुछ सुझाव भी दिए। निश्चित रूप से यह एक अनोखी पहल है जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री ने छात्रों से परीक्षा के संदर्भ में संवाद किया। शायद इससे पहले किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया था।

लेकिन इसके साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि परीक्षा पर चर्चा का महत्त्व तब और समझ आए जब ‘रोजगार पर चर्चा’ भी हो। मगर यह दुखद है कि रोजगार पर ऐसी चर्चा नहीं की जाती। न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि उनके मंत्री और अन्य नेता भी रोजगार की चर्चा से दूर भागते नजर आते हैं। विपक्ष द्वारा जब सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश की जाती है तब वह केंद्रीय भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) के आंकड़े दिखा कर मामले को शांत करने का प्रयास करती है। बाकी रही-सही कसर देश को हिंदू-मुसलिम और पाकिस्तान में उलझा कर मीडिया पूरी कर देता है।

इपीएफओ के आंकड़े गलत नहीं हैं और न ही कोई उन्हें गलत ठहराता है। मगर उन छात्रों का क्या जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं? ये छात्र महंगी फीस चुका कर फॉर्म भरते हैं। लेकिन अंत में होता क्या है? परीक्षा कराई ही नहीं जाती और कराई भी जाती है तो एक-दो साल बाद। अगर परीक्षा हो भी गई तो किसी न किसी स्तर पर उसमें कुछ न कुछ बाधाएं आ जाती हैं और वह परीक्षा कानूनी झमेले में फस जाती है। इस सबका परिणाम यही हो रहा है कि छात्रों की उम्र बढ़ती जा रही है और पदों की संख्या के साथ उनकी उम्मीदें भी कम होती जा रही हैं। लेकिन कोई भी राजनेता इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं। सब अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं।

यह एक बड़ी आवश्यकता और समय की मांग है कि हमारी सरकार, नेता और मीडिया हिंदू-मुसलिम और पाकिस्तान के मुद्दे को छोड़ कर छात्रों के भविष्य और उनके रोजगार के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करें क्योंकि छात्र ही देश का भविष्य हैं।
’विक्की, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली

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