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चौपालः अमन के दुश्मन

आज दो तरह के कश्मीरी खुशहाल हैं। एक वे जो कश्मीर छोड़ कर नौकरी करने के लिए हिंदुस्तान के बाकी हिस्सों में जा पहुंचे हैं और दूसरे वे जिन्होंने पत्थर फिंकवाने का ठेका लिया हुआ है।

Author July 16, 2016 03:17 am

आज दो तरह के कश्मीरी खुशहाल हैं। एक वे जो कश्मीर छोड़ कर नौकरी करने के लिए हिंदुस्तान के बाकी हिस्सों में जा पहुंचे हैं और दूसरे वे जिन्होंने पत्थर फिंकवाने का ठेका लिया हुआ है। आखिर कौन लोग हैं जो कश्मीर की आजादी की बात करते हैं? किस बला से चाहिए उन्हें आजादी? दो उदाहरण देता हूं, आप खुद अंदाजा लगाएं। (1) गिलानी साहब खुद का इलाज दिल्ली में कराते हैं और बच्चों को विदेशों में सेटल करके यहां के गरीब कहें या अशिक्षित या गुमराह होने में आसान लोगों के बच्चों को पत्थर फेंकने के लिए ठेकेदारों के साथ जोड़ते हैं। (2) नए ताजे उमर खालिद कश्मीर को आजादी दिला कर रहेंगे, लेकिन खुद कई वर्षों से शिक्षा लेने के लिए दिल्ली में डटे हैं। जेएनयू से खालिद साहब मास्टर बन रहे हैं या मास्टर माइंड, इसकी झलक अभी से दिखने लगी है। क्या उन्हें नहीं जाना चाहिए इस्लामाबाद से शिक्षा लेने के लिए? उन्हें भी तो पता चले कि जिस कट्टरपंथी देश की मुहिम का वे समर्थन करते हैं वहां की शिक्षा और जीवन का स्तर क्या है।

अब सवाल उठता है कि आजाद कश्मीर की जरूरत किसे है? कैसी आजादी? किससे आजादी? उन्हीं कश्मीरियों की बात न जिनमें से आधी आबादी कश्मीर छोड़ कर देश के अलग-अलग हिस्सों में जा बसी है या फिर अलगाववादियों द्वारा खदेड़ दी गई है? या फिर उन्हें आजादी चाहिए जो पाकिस्तान के समर्थन से अमानवीयता का विष कश्मीर में घोल रहे हैं?

बुरहान वानी ‘पोस्टर बॉय’ मर गया। तस्वीरों में दिखाने के लिए बहुत कुछ है। लाखों की कीमत वाली बंदूकों के साथ बुरहान वानी की तस्वीरें सोशल मीडिया में जो वायरल हैं। बुरहान या अन्य जो भी लोग जेहाद या इस्लाम के लिए काम करते हैं उन्हें ये महंगे हथियार अल्लाह उपलब्ध कराता है या पाकिस्तान?

अब सेना की बात करें तो देश की सेना किसी दूसरे ग्रह से नहीं आई है जो मानवता को नष्ट कर रही है। जब बुद्धिजीवी लोग ‘डिबेट’ में कह रहे होते हैं कि सेना कश्मीर में अन्याय कर रही है तब कोई सेना का जवान आतंकवादियों के किसी ग्रेनेड या एके-47 के निशाने पर होता है। हम उस सेना को कैसे भूल जाते हैं जो बाढ़ में फंसे एक-एक कश्मीरी को अपनी जान जोखिम में डाल कर बचाती है!

दरअसल, मैं कश्मीर की समस्या पर कोई समाधान या फैसला नहीं दे सकता लेकिन जो भी लोग बुरहान या अलगाववाद या आतंकवाद के समर्थकों के पक्ष में बातें करते हैं वे इंसानियत और मानवता के हितैषी तो नहीं हो सकते। जो लोग कह रहे हैं ये कुछ भटके हुए नौजवान हैं, उन्हें समझा बुझा कर रस्ते पर लाया जा सकता है, समझना उन्हें होगा कि वो भटके हुए नहीं बल्कि बाकायदा प्रशिक्षित और प्रायोजित हैं। इनके आका अपने बीवी-बच्चों को हिंदुस्तान के अन्य हिस्सों या अमन वाले देशों में रखते हैं और घाटी के गरीब या अशिक्षित नौजवानों को मरने-मारने के लिए प्रेरित करते हैं। दुनिया में खूबसूरत झीलों की घाटी की सैर और पर्यटन से जीवन यापन के लिए प्रेरणा न देकर पत्थर और बंदूक उठा कर पैसे कमाने का जो हुनर अमन के दुश्मनों ने कश्मीर में घोला है उसे कम से कम बुद्धिजीवी न घोलें तो बेहतर होगा।
’अखिलेश द्विवेदी

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