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चौपालः बिहार का सबक

पूरे देश में बारहवीं कक्षा के परिणाम आ चुके हैं। अलग-अलग राज्यों और बोर्ड के ‘टॉपर’ भी देश को मिल चुके हैं और इन्हीं के साथ मिले हैं बिहार के आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार।

Author June 3, 2017 2:29 AM
बिहार के इंटर आर्ट्स ‘टॉपर’ गणेश कुमार (YOUTUBE GRAB)

पूरे देश में बारहवीं कक्षा के परिणाम आ चुके हैं। अलग-अलग राज्यों और बोर्ड के ‘टॉपर’ भी देश को मिल चुके हैं और इन्हीं के साथ मिले हैं बिहार के आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार। बिहार में बारहवीं के परिणाम पिछली बार की तरह इस बार भी निराशाजनक रहे। 64 प्रतिशत छात्रों के फेल होने से वहां हाहाकार जैसा मच गया है। 3027 स्कूल-कॉलेजों में 12,40,168 परीक्षार्थियों ने बारहवीं की परीक्षा दी जिनमें से 654 स्कूलों का परिणाम शून्य प्रतिशत रहा। यानी एक भी काबिल विद्यार्थी वहां से नहीं मिला। इससे बिहार बोर्ड पर तो सवाल उठ ही रहे हैं, कठघरे में इस बार के आर्ट्स टॉपर गणेश कुमार को भी खड़ा कर दिया गया है।
अब पूरी भीड़ शिक्षा व्यवस्था की खामियां तलाशने से खिसक कर गणेश को ‘ट्रोल’ करने में जुट गई है। हर जगह, चाहे वह सोशल मीडिया, न्यूज चैनल या अखबार हों, गणेश पर चुटकुले बनाए जा रहे हैं। लेकिन क्या सच में यह वक्त गणेश पर तंज कसने का है या कड़ाई से चोर शिक्षा व्यवस्था पर लगाम कसने का है? सिर्फ कुछ सवाल और बहस बदल गई! अब न तो यह पूछने की जरूरत रह गई कि स्कूलों की हालत क्या है। कितने दिन मास्टर स्कूल आए, कितने दिन विद्यार्थी की उपस्थिति रही? प्रेक्टिकल कराए गए तो कैसे कराए गए? स्कूलों में विद्यार्थी के प्रेक्टिकल के लिए पर्याप्त और वांछित साधन उपलब्ध हैं या नहीं? और इन सबके साथ स्कूल-कॉलेजों में मास्टरों की क्या दशा और भूमिका रही है? इन सवालों पर से ध्यान हटा कर मुद्दा अब केवल गणेश को ट्रोल करने का रह गया है। अगर नींव ही कमजोर रहेगी तो उस पर खड़े किए गए महल को कैसे मजबूत समझा जाए? इसका अर्थ यह नहीं कि उस दीवार पर पत्थर मारा जाए बल्कि नए सिरे से उसे मजबूत करने के तरीके तलाशे जाने चाहिए।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने के लिए राज्य सरकार को गुणी शिक्षकों के साथ-साथ स्कूलों में पढ़ाई लिखाई के अच्छे शैक्षिक संसाधन और सुविधाएं जुटाने चाहिए। शुरू से अंत तक की कार्रवाई में पारदर्शिता दिखाते हुए धांधली को रोकना होगा। फर्जी दाखिलों को खारिज करना होगा। सबसे महत्त्वपूर्ण यह कि सरकार और शैक्षिक तंत्र दोनों को मिल कर छात्र-छात्राओं को भरोसे में लेना होगा कि उनके लिए उचित शिक्षा के साथ उन्नत रोजगार भी है। इससे कोई भी शिक्षा को हल्के में नहीं लेगा और पूरी मेहनत करेगा। गणेश कुमार ने अपने साक्षात्कार में कहा कि उसके घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। यह बात किसी से छुपी भी नहीं है कि बिहार में गरीबी का क्या स्तर है। ऐसे में विद्यार्थी पढ़ने पर कम ध्यान देगा और कुछ कमाने के तरीके तलाशेगा। इसलिए बेहद जरूरी है कि बेहतर शिक्षा के साथ-साथ अच्छा रोजगार भी दिया जाए।
’खुशबू, मुकुंदपुर, दिल्ली

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