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चौपालः संघर्ष अविराम

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रमजान के दौरान वाजपेयी सरकार की सन 2000 की ‘संघर्ष विराम’ की घोषणा मोदी सरकार द्वारा अपनाए जाने की अपील की है।

Author May 15, 2018 4:09 AM
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती। (फोटो सोर्स एक्सप्रेस फोटो और शोएब मसूदी)

संघर्ष अविराम

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रमजान के दौरान वाजपेयी सरकार की सन 2000 की ‘संघर्ष विराम’ की घोषणा मोदी सरकार द्वारा अपनाए जाने की अपील की है। देश जानता है कि वह कथित संघर्ष विराम असफल रहा था। उस घोषणा के एक हफ्ते के भीतर आतंकवादियों ने श्रीनगर हवाई अड्डे पर हमला कर भारी क्षति पहुंचाई थी। उसके बाद और भी हमले हुए। इसीलिए यह प्रयोग खुद वाजपेयीजी ने 2001 में नहीं दोहराया।

दरअसल, इस समय अलगाववादी तत्त्व बचाव की मुद्रा में हैं। वे जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। संघर्ष-विराम की आड़ लेकर वे खुद को सुरक्षित ठिकानों में रखने में सफल होंगे, ताकि रमजान में ही या उसके बाद तरोताजा होकर फिर आक्रमण करें। वैसे इस्लामी इतिहास की बात करें तो पैगंबर साहब ने मक्का के कुरैशों के खिलाफ पहली लड़ाई जो बदर नामक स्थान पर हुई, रमजान में ही लड़ी थी। रमजान में युद्ध न करने की कोई इस्लामी रिवायत नहीं है। इराक-ईरान युद्ध (1980-1988) के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कई भीषण हमले रमजान में ही हुए।

अजय मित्तल, मेरठ

ईरान के साथ

अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के बाद विश्व के सभी देश चिंतित हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस इकतरफा फैसले के बाद विश्व का कोई भी देश अमेरिका के साथ खड़ा नहीं दिख रहा है। इस गंभीर मामले पर भारत ने परिपक्वता दिखाते हुए कहा कि इसे बातचीत और राजनयिक उपायों से सुलझाना चाहिए। दरअसल, भारत और ईरान का व्यापारिक रिश्ता काफी महत्त्वपूर्ण है। भारत को कच्चा तेल निर्यात करने के मामले में ईरान तीसरा सबसे बड़ा देश है।

अच्छी बात है कि भारत ने जाहिर कर दिया है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर वित्तीय प्रतिबंध के फैसले से भारत के वहां से कच्चे तेल के आयात पर असर नहीं पड़ेगा। अब विश्व की निगाहें तेहरान पर जा टिकी हैं क्योंकि गेंद उसके पाले में है। ईरान के हर फैसले का भारत सहित सभी देशों को बड़े ध्यान से निरीक्षण करना होगा।

पियूष कुमार, नई दिल्ली

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