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चौपालः रोजगार की खातिर

अगले साल लोकसभा चुनाव में 18 से 35 साल के बीच लगभग 50 फीसद युवा मतदाता होंगे, जो किसी भी पार्टी की सरकार बनाने की दिशा तय करेंगे। अगर राजग सरकार फिर से बहुमत के साथ सत्ता में वापसी चाहती है तो उसे युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।

Author May 31, 2018 4:54 AM
(Express Photo)

अगले साल लोकसभा चुनाव में 18 से 35 साल के बीच लगभग 50 फीसद युवा मतदाता होंगे, जो किसी भी पार्टी की सरकार बनाने की दिशा तय करेंगे। अगर राजग सरकार फिर से बहुमत के साथ सत्ता में वापसी चाहती है तो उसे युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। इसके लिए उसे इन चार उपायों पर गंभीरता से गौर करना चाहिए। पहला उपाय, केंद्र तथा राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में 20 लाख से ज्यादा खाली पद भरने की जल्द पहल की जाए। इस वक्त 21 राज्यों में भाजपा और राजग की सरकारें हैं और केंद्र सरकार चाहे तो एक साल के भीतर युवाओं को 10 लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां दे सकती है। इनमें से करीब 70 फीसद पद ग्रुप ‘सी’ और ग्रुप ‘डी’ के हैं, जिन्हें वह कुछ महीनों में भर सकती है।

दूसरा उपाय, सरकार रोजगार केंद्रित औद्योगिक एवं व्यापार नीति लाए, जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मंझले उद्योग के बुनियादी ढांचे के विकास पर खास जोर दिया जाए। अगर सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग की समस्याओं को दूर कर उन्हें वित्तीय सहायता मुहैया कराए तो वर्तमान स्तर से 30 से 40 फीसद रोजगार में इजाफा संभव है। साथ ही नई औद्योगिक एवं व्यापार नीति में श्रम बल वाले छोटे उद्योगों के संरक्षण की व्यवस्था की जाए। बड़ी संख्या में रोजगार देने वाली कंपनियों को श्रम कानून से मुक्त करने की पहल भी की जाए। तीसरा उपाय, पूंजी आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी को वेतन आधारित बनाया जाए, यानी कोई भी उद्यम जितनी अधिक नौकरियां दे, उसे उतनी ज्यादा सब्सिडी मिले। इससे संगठित क्षेत्र में ज्यादा रोजगार पैदा होंगे।

चौथा उपाय, उच्च शिक्षा में आमूल चूल बदलाव करते हुए स्नातक पाठ्यक्रमों को अब एकीकृत पाठ्यक्रमों में बदला जाए यानी इसके साथ आईटीआई एवं पीजीडीसीए जैसे पाठ्यक्रम अनिवार्य कर दिए जाएं। ऐसा इसलिए कि तकनीकी दौर में सामान्य स्नातक और परास्नातक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बेहद कम हो गए हैं। पांचवें एवं दीर्घकालिक उपाय के तहत शिक्षा, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं रोजगार के अंतराल को पाटने के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करना चाहिए, क्योंकि वर्तमान में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करके निकल रहे युवाओं में 10 फीसद को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा। ऐसी स्थिति में केंद्र को दुनिया के सबसे सफल व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के जर्मन मॉडल को अपनाने के लिए व्यवसायियों को तैयार करना चाहिए। इसमें जर्मनी के व्यवसायी कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए काफी धन खर्च करते हैं। बदले में उन्हें अच्छे कर्मचारी मिल जाते हैं। अगर हम ऐसा कर पाए तो कुशल भारत, खुशहाल भारत के सपने को चरितार्थ करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

कैलाश एम बिश्नोई, जोधपुर

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