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चौपाल: अमन की खातिर

अमेरिका समर्थित इजराइल के विरुद्ध सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश खड़े हैं। रूस समर्थित सीरियाई सरकार के विरुद्ध अमेरिका समर्थित इजराइल सहित अनेक खाड़ी देश हथियार ताने हुए हैं।

Author October 6, 2018 4:24 AM
दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए चीन, रूस और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच होड़ मची हुई है।

आज विश्व को शांति के विषय में सोचने की परम आवश्यकता है। वैश्विक राजनीति के वर्तमान परिदृश्य को देखा जाए तो संसार में चारों ओर अशांति का वातावरण बना हुआ है। पूरा विश्व कई ध्रुवों में बंटा नजर आता है। मध्य-पूर्व में दो गुटों में वर्षों से चली आ रही तनातनी जगजाहिर है। अमेरिका समर्थित इजराइल के विरुद्ध सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश खड़े हैं। रूस समर्थित सीरियाई सरकार के विरुद्ध अमेरिका समर्थित इजराइल सहित अनेक खाड़ी देश हथियार ताने हुए हैं। इनके आपसी संघर्ष में प्रतिदिन सैनिकों सहित आम लोगों की जानें जा रही हैं। अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध और लगातार धमकी देने से तनाव बढ़ता ही जा रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए चीन, रूस और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच होड़ मची हुई है। नए-नए सैन्य गठजोड़ बनाते हुए महासागरों में सैन्य ठिकाने स्थापित किए जा रहे हैं। भारी मात्रा में नरसंहार करने में सक्षम हथियारों और लड़ाकू विमानों की खरीदी व तैनाती की जा रही है।

इन गतिविधियों के अलावा नाटो जैसे सैन्य गठबंधनों की स्थापना और चुनिंदा देशों के बीच द्विपक्षीय या बहुपक्षीय युद्धाभ्यास वैश्विक शांति को मुंह चिढ़ाते प्रतीत होते हैं। इसके अतिरिक्त मध्य-पूर्व में जन्म लेकर अन्य देशों में पैर फैला रहे आईएस जैसे आतंकी संगठन विश्व शांति के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। भारत के संदर्भ में देखें तो पाकिस्तान के साथ शत्रुता गहरी होने के साथ ही अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में पहले जैसी मधुरता नहीं रही है। यह क्षेत्रीय शांति के लिए कतई शुभ संकेत नहीं है।

इस बीच मालदीव में भारत समर्थक विचारधारा वाली पार्टी का चुनाव में विजयी होना, उत्तर कोरिया का अमेरिका के साथ वार्ता के मंच पर आकर परमाणु निशस्त्रीकरण के लिए राजी होना जैसी घटनाएं जरूर कुछ राहत देतीं हैं। लेकिन ये पर्याप्त नहीं हैं। वर्तमान परिस्थितियां विश्व को तीसरे विश्व युद्ध की ओर धकेलती-सी लगती हैं। इसे जल्द से जल्द संभालने की जरूरत है। सभी देशों को हथियारों की अंधी होड़ से बचते हुए विवादित मसलों को आपसी बातचीत से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए सभी हितधारकों को सामने आते हुए संयुक्त राष्ट्र के मंच का बेहतर तरीके से उपयोग करना चाहिए। विश्व शांति के बिना मानव के अस्तित्व और कल्याण की कल्पना करना असंभव है।
’ऋषभ देव पांडेय, कोरबा, छत्तीसगढ़

तिनके का सहारा
सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए पिछले दिनों रबी की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया है। स्वामीनाथन समिति के सुझाव के मद्देनजर सरकार ने लागत के आधार पर इस बार एमएसपी में इक्कीस फीसद तक की वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी के कई कारण हैं। पहला, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत में इजाफा, दूसरा, किसानों की आय दोगुना करने की सरकार की कोशिश और तीसरा, 2019 में होने वाला लोकसभा चुनाव। लेकिन सवाल है कि क्या यह बढ़ोतरी जमीनी हकीकत को बदल पाएगी? क्या यह सिर्फ तेल के बढ़ते दाम के मद्देनजर की गई है?

यह किसानों को कितनी राहत पहुंचा पाएगी, आदि। किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य की दिशा में यह एक छोटा-सा कदम है। देखना है कि इसका कार्यान्वयन बाजार तक कितना होता है क्योंकि सरकार अभी तक बिचौलियों को नहीं हटा पाई है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में जहां रुपए की कीमत गिरती जा रही है और तेल की कीमत बढ़ती जा रही है, एमएसपी बढ़ाया जाना किसानों के लिए डूबते को तिनके के सहारे जैसा है।
’अभयजीत कुमार सिंह, दिल्ली

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