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चौपालः युवा का हाल

राजधानी दिल्ली जैसे शहरों में विद्यार्थी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। आखिर इसका दोषी कौन है? सरकार या जनता? हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। सरकार ऐसी नीतियों का निर्माण ही क्यों करती है, जिससे जनता हिंसा पर उतारू हो जाए?

Author Updated: December 26, 2019 2:40 AM
सीएए के खिलाफ प्रोटेस्ट करते प्रदर्शनकारी, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

कई बार बहुत से लोगों को यह कहते हुए सुना है कि युवा इस देश के भविष्य हैं। विगत कुछ दिनों से देश के हालात को देख कर कहा जा सकता है कि देश का भविष्य खतरे में है। राजधानी दिल्ली जैसे शहरों में विद्यार्थी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। आखिर इसका दोषी कौन है? सरकार या जनता? हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। सरकार ऐसी नीतियों का निर्माण ही क्यों करती है, जिससे जनता हिंसा पर उतारू हो जाए?

दूसरी ओर, जनता भी नीतियों का विरोध हिंसात्मक तरीके से क्यों करती है? क्या यही एक रास्ता है? हिंसा से समाज का अपना ही घाटा है। दूसरी ओर, विद्यार्थियों पर हमले की खबर भी उभर कर आती है। आखिर क्यों एक विद्यार्थी सरकार और जनता के बीच की लड़ाई में पिसता नजर आ रहा है? आखिर उन मासूमों का क्या दोष जो भारत के उच्च केंद्रीय संस्थानों से शिक्षा ग्रहण कर रहें हैं। उन रोती-बिलखती मासूम आंखों से एक ही सवाल उभर कर आता है कि क्या हम सरकार पर से अपना भरोसा खत्म कर दें? इसी बीच कुछ पुलिस हमलों की खबर भी उभर आती है। आखिर ऐसे हालात में मनुष्य करे भी तो क्या करे, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए।

सवाल यह नहीं है कि देश में ऐसा क्यों हो रहा है। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति ही पैदा क्यों हो रही है। अब हम पुलिस से ऐसी अपेक्षा कैसे करें कि वह अपना व्यवहार बदल ले। आंदोलन को रोकने की कोशिश में वह आज लोगों को मार कर अधमरा कर दे रही है। क्या इस हिंसा का कोई विकल्प नहीं है? क्या उन पर रोक लगाने वाला कोई नहीं? सरकार की कोशिश यह होनी चाहिए कि अगर कोई उससे सवाल करे तो जवाब देने में उसे शर्मिंदगी महसूस न हो।
’आयुष द्विवेदी, दिल्ली विवि

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