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चौपाल: सड़कों पर किसान

कई बार तो किसानों को उसकी लागत के अनुरूप दाम नहीं ही मिल पाता यानी उनकी जो लागत फसल में लगी होती है, वह भी वसूल नहीं हो पाती। इन सब समस्याओं से जूझते किसान के सामने फसल का कर्ज चुकाने की एक और समस्या खड़ी रहती है।

दिल्ली में जुटे देशभर से किसान। (फोटो – पीटीआई)

फसल कर्ज माफी और फसलों के उचित मूल्य सहित अपनी कई मांगों को लेकर देशभर के किसानों ने दिल्ली में फिर दस्तक दी। लेकिन उन्हें अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। यह पहली बार नहीं है कि किसान आंदोलित होकर दिल्ली आए हैं। पहले भी कई बार किसान आंदोलित होकर दिल्ली में धरने-प्रदर्शन करते आए हैं। लेकिन हर बार उन्हें झूठे आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। किसानों की समस्याएं किसी से छिपी नहीं हैं। वे दिन-रात खेतों में पसीना बहाते हैं और ओलावृष्टि, बाढ़, सूखे जैसी पारकृतिक आपदाओं से जूझते हुए खेती करते हैं। लेकिन मंडियों में उन्हें अपनी फसल का उचित दाम ही नहीं मिलता। खरीद केंद्र पर हावी बिचौलिए किसान को उसकी फसल ओने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर कर देते हैं।

कई बार तो किसानों को उसकी लागत के अनुरूप दाम नहीं ही मिल पाता यानी उनकी जो लागत फसल में लगी होती है, वह भी वसूल नहीं हो पाती। इन सब समस्याओं से जूझते किसान के सामने फसल का कर्ज चुकाने की एक और समस्या खड़ी रहती है। लेकिन लागत की तुलना में दाम न मिलने से किसान इस कर्ज को चुकाने में असहाय हो जाता है। यही वजह है जब किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाते हैं। सरकार को चाहिए कि वह किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान दे और उनकी मांगों का उचित निस्तारण करे, ताकि किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर न होना पड़े।
’अभिषेक मिश्रा, बरेली

असुरक्षित बुजुर्ग
‘बुजुर्गों को सामान्य कतार में लगने की कोई आवश्यकता नही है।’ दिल्ली के सरकारी दवाखाने की सूचना पट्टिका पर यह सूचना लगी देख कर मन में दो तरह की बातें उठने लगीं। जहां इस प्रकार की सूचनाएं जागरूकता को दर्शाती हैं, वहीं दूसरी ओर संवेदनहीन समाज के भेद को भी खोलती हुर्इं नज़र आती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट आई थी कि देश की राजधानी दिल्ली वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे असुरक्षित शहर है। वर्ष बदल गए लेकिन हालात अब भी वही है, जनवरी 2018 से अब तक कई बुज़ुर्गों के साथ शर्मसार करने वाली घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जिन कारणों से बुजुर्गों को अपराध का निशाना बनना पड़ता है, उनमें लूटपाट, ठगी और हत्याएं प्रमुख हैं। तो ऐसे में इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किन हाथों में हैं? वर्तमान परिस्थितियां तो यही बयां कर रही हैं कि दिल्ली अब महिलाओं के साथ-साथ बुजुर्गों के लिए भी खौफ का माहौल तैयार कर रही है।
’श्वेता झा, डीएसजे, दिल्ली विवि

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