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चौपालः हमारा दायित्व

आज गंगा को बचाना धार्मिक कारणों से ज्यादा हमारे पर्यावरण और देश के लिए जरूरी है। गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है।

Author August 5, 2017 12:01 AM
(फाइल फोटो)

आज गंगा को बचाना धार्मिक कारणों से ज्यादा हमारे पर्यावरण और देश के लिए जरूरी है। गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यह 2525 किलोमीटर इलाके में बहती है और देश के 40 फीसद लोगों को पानी उपलब्ध कराती है। लेकिन पिछले कई वर्षों से गंगा पर राजनीति भी खूब हुई है। अच्छी बात यह रही कि सरकार ने गंगा की सुध लेने की कई पहल भी कीं, विशेषज्ञों से सलाह ली गई, सिर्फ इसी काम के लिए मंत्री बनाया गया और कई तरह के दिशा-निर्देश दिए गए।

इसी कड़ी में अब राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गंगा में किसी भी तरह का कचरा फेंकने पर पचास हजार का जुर्माना लगाने का आदेश दिया है और साथ ही नदी किनारे सौ मीटर का दायरा गैर निर्माण क्षेत्र घोषित किया है। इसी संबंध में उत्तर प्रदेश को अपनी जिम्मेदारी समझने की बात कही गई है। उसे यह भी कहा गया है कि चमड़े के कारखानों को उचित जगह पर छह सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त कई तरह के सामाजिक एवं धार्मिक संगठन भी गंगा को लेकर तत्पर दिखाई दिए हैं, पर अभी तक वैसा कुछ हुआ नहीं है जिससे कुछ ठोस नतीजा निकला हो। इसमें सबसे बड़ा कारण या दोष लोगों की गंगा के प्रति लापरवाही है। लिहाजा, समयानुसार हमें भी अब गंगा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा, स्थिति संभालनी होगी, नहीं तो दुर्दशा देख कर लगता है कि आने वाले समय में गंगा किताबों की कथाओं तक सीमित रह जाएगी। हम लोगों के साथ आने से सरकार की मुहिम को भी सहारा मिलेगा।

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सिर्फ गंगा नहीं, हम चाहें तो अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के सही पालन से हर उस चीज को बेहतर बना सकते हैं, जिसका महत्त्व हमारे लिए बहुत ज्यादा है। आपसी बातचीत के दौरान कई बार जिक्र होता है कि फलां-फलां देश की सड़कें, तालाब, नदियां आदि बहुत साफ-सुंदर हैं, पर हमारी क्यों नहीं! हमें यह बात समझनी होगी कि उन देशों के निवासी अपनी नदियों, तालाबों, सड़कों आदि को साफ रखने की जिम्मेदारियां सही से निभाते हैं और अपनी जिम्मेदारियों को केवल खुद तक सीमित रखते हैं, मतलब अपना खाना, वस्त्र, घर, गाड़ी साफ हो, बस हो गया! हमें अब नदियों, तालाबों, सड़कों, धरोहरों के प्रति अपनी-अपनी जिम्मेदारियां अलग से समझनी होंगी। केवल सरकार के भरोसे हम उम्मीद करें कि सड़कें, नदियां आदि सब साफ हो जाएं या साफ रहें, तो अभी तक किसी भी देश की सरकार अपने लोगों के सहयोग के बिना कोई भी ऐसा काम नहीं कर पाई है, जिससे उसकी शान में चार चांद लगे हों।
’देवेंद्रराज सुथार, जेएनवीयू, जोधपुर

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