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चौपालः अधूरा सपना

भगतसिंह और उनके साथियों के लेखों-बयानों से पता चलता है कि उन्होंने ऐसा भारत बनाने का सपना देखा था जहां एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान का शोषण न हो।

Author April 3, 2019 2:09 AM
शहीद भगत सिंह

हमारे स्वाधीनता संग्राम के शहीद कैसे भारत का निर्माण करना चाहते थे और आज के हालात क्या हैं! आज के दौर के सबसे प्रासंगिक क्रांतिकारी विचारकों की सूची तैयार की जाए तो भगतसिंह उसमें आगे की पंक्ति में ही होंगे। भगतसिंह और उनके साथियों के लेखों-बयानों से पता चलता है कि उन्होंने ऐसा भारत बनाने का सपना देखा था जहां एक इंसान द्वारा दूसरे इंसान का शोषण न हो। शहीदों का कहना था कि आजादी का मतलब सिर्फ गोरी चमड़ी के लोगों से आजादी हासिल कर लेना नहीं है बल्कि वास्तविक आजादी तभी आ सकती है जब देश के मजदूरों, गरीब किसानों, नौजवानों, महिलाओं यानी हरेक दबे-कुचले वर्ग को हर प्रकार के शोषण से आजादी मिले। मतलब मेहनत करने वाले लोगों को उनकी मेहनत का पूरा हक मिले। लेकिन आज समाज में महंगाई, बेरोजगारी व गैर-बराबरी देख कर कह सकते हैं कि आजादी के 70 साल बाद भी भगतसिंह का सपना अधूरा है।

आज भी देश के मजदूर-किसान, जो इस दुनिया की सुई से लेकर जहाज तक, अनाज से लेकर कपास तक सारी सुख-सुविधा पैदा करते हैं, वे ही बदहाली की जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। हर साल हजारों अन्नदाता गरीब किसान कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं। कॉलेजों-विश्वविद्यालयों की डिग्रियां लेकर युवा आबादी बेरोजगारों की फौज में खड़ी है। वहीं दूसरी तरफ नेता-मंत्री मेहनतकशों की कमाई पर ऐश करते हैं। अगर आम जनता शिक्षा, रोजगार व स्वास्थ्य जैसे बुनियादी हकों के लिए एकजुट होती है तो ये नेता हमें धर्म और जाति के नाम पर लड़ाते हैं। वहीं देश की मेहनत-मशक्कत करने वाली आबादी आधा पेट खाकर भी अपने बच्चों को पढ़ाती है पर उसके साथ सरकारें दगाबाजी कर रही हैं। भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरुके शहीदी दिवस सही मायने में उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के संकल्प दिवस होने चाहिए।
अजय स्वामी, मुकुंद विहार, दिल्ली

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